Saran News (नदीम अहमद) : अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शायर डॉ बशीर बद्र के निधन पर राहत रोड, करीम चक अवस्थित डॉ मोअज्जम के निवास पर शोक सभा का आयोजन किया गया. अध्यक्षता अल्हाज निहाल अहमद ने की. सभा में उपस्थित लोगों ने दिवंगत को श्रद्धांजलि अर्पित की. अपने विचार रखते हुए डॉ अज़्म ने कहा कि बशीर बद्र का कलाम अपने समय के सबसे नायाब शायरी में माना जाता है. उनके यहां नए और अनोखे शब्दों का इस्तेमाल इस तरह से किया गया है जो दूसरे शायरों में नहीं मिलता. जैसे, यह शेर “कोई फूल धूप की पत्तियों में हरे रिबन से बंधा हुआ, वो गजल का लहजा नया नया न कहा हुआ न सुना हुआ” प्रो शमीम परवेज ने कहा कि बशीर बद्र के निधन से उर्दू शायरी के एक ऐसे दौर का अंत हो गया, जो अपने अनोखे और आधुनिक लहजे के लिए जाना जाता है.
करीम चक शोक सभा में कई साहित्यकारों ने दी श्रद्धांजलि
शमीम साहब ने उन्हें इस शेर से याद किया “लोग हर धड़कते पत्थर को लोग दिल समझते हैं, उम्रें बीत जाती हैं दिल को दिल बनाने में” अध्यक्ष नेहाल अहमद ने कहा कि बशीर बद्र के जाने से शायरी की दुनिया में एक ऐसा खालीपन आ गया है जिसे भरा नहीं जा सकता. डॉ शहज़ाद आलम ने खामा सरायी करते हुए कहा कि डॉ बशीर बद्र छपरा में आयोजित होने वाले ऑल इंडिया मुशायरों में अक्सर हिस्सा लेते थे. उनकी उपस्थिति से वे मुशायरे यादगार बन जाया करते थे. उन्होंने बशीर साहब के शेर “उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए” को कोड किया. इस मौके पर अल्हाज डॉ सैयद मुश्ताक अहमद, डॉ मजहर किबरिया, डॉ अब्दुल समद, मो तैयब हुसैन एडवोकेट, मुहम्मद हाशिम, नेयाज अहमद, अब्दुल कलाम, मुसर्रत कमाल, अली अब्बास, शकील अनवर, अनवार आलम, शाहिद जमाल, नदीम अहमद, शमशीर आलम आदि ने भी उनके निधन पर गहरा दुख जताया.
Also Read : गोपालगंज: बेटे को घेरने के बाद पिता पर किया गया हमला
