सारण के इस पौराणिक स्थल की बदलेगी तस्वीर, रामायण सर्किट से जोड़ने की तैयारी; धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

सारण जिले का गौतम ऋषि आश्रम-अहिल्या उद्धार स्थल जल्द ही धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बनेगा. जिला प्रशासन इसे रामायण सर्किट से जोड़ने की कवायद तेज कर चुका है. इस विकास से न केवल श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.

Gautam Rishi Ashram Saran: सारण जिले के रिविलगंज प्रखंड स्थित गौतम ऋषि आश्रम-अहिल्या उद्धार स्थल को अब धार्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की कवायद तेज हो गई है. जिला प्रशासन इस पौराणिक और धार्मिक स्थल को रामायण सर्किट से जोड़ने की दिशा में पहल शुरू कर चुका है. इसके लिए स्थल के विकास की संभावनाओं का आकलन करते हुए आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का खाका तैयार किया जा रहा है.

इसी क्रम में सोमवार को उप विकास आयुक्त लक्ष्मण तिवारी ने गौतम ऋषि आश्रम-अहिल्या उद्धार स्थल का स्थल भ्रमण कर निरीक्षण किया. उन्होंने स्थल की वर्तमान स्थिति, विकास की संभावनाओं तथा यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए जरूरी सुविधाओं का जायजा लिया.

प्रवेश द्वार से पार्किंग तक विकसित होंगी सुविधाएं

स्थल के विकास के लिए कई बुनियादी सुविधाओं पर विशेष जोर दिया जा रहा है. इनमें भव्य प्रवेश द्वार, स्थल का समतलीकरण, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, शौचालय, पार्किंग, विश्राम स्थल और बैठने की व्यवस्था शामिल हैं. इसके अलावा स्थल तक पहुंचने वाले मार्गों पर दिशा-सूचक बोर्ड तथा पर्यटन और स्थल के धार्मिक-पौराणिक महत्व से संबंधित सूचना-पट्ट लगाने पर भी विचार किया गया.

इन सुविधाओं के विकसित होने से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को यहां पहुंचने के बाद बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी.

अधिकारियों को प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश

उप विकास आयुक्त ने संबंधित पदाधिकारियों को स्थल के विकास के लिए आवश्यक भूमि, आधारभूत संरचना और संभावित कार्यों का आकलन कर प्रस्ताव एवं प्राक्कलित प्रतिवेदन तैयार करने का निर्देश दिया. इसके लिए भूमि सुधार उप समाहर्ता, सदर छपरा, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी, सारण, अंचल अधिकारी, रिविलगंज तथा कार्यपालक पदाधिकारी, नगर पंचायत रिविलगंज को आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है.

धार्मिक पर्यटन के साथ रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद

जिला प्रशासन का उद्देश्य स्थल की आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को संरक्षित रखते हुए आधुनिक पर्यटक सुविधाओं का विकास करना है. प्रशासन का मानना है कि बेहतर सुविधाएं विकसित होने और रामायण सर्किट से जुड़ने के बाद यह स्थल बिहार के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्रों में अपनी पहचान बना सकता है.

रामायण सर्किट से जुड़ने की पहल सफल होने पर सारण में देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के पहुंचने की संभावना बढ़ेगी. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार, कारोबार और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल सकती है.

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By संजय भारद्वाज

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