पहले सड़क थी...आज गर्दन भर पानी : सारण में बांध टूटा, दो लाख लोग परेशान, बाढ़ के हैरान करनेवाले नजारे देखिए

सारण में बाढ़ की स्थिति भयावह होती जा रही है. रिविलगंज के दिलिया रहीमपुर में सड़क पर गर्दन तक पानी भर गया है, जहां एक महिला जरूरी सामान लेने के लिए गहरे पानी में उतरती नजर आई. जिले के 7 प्रखंडों के 93 गांवों में 2.05 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं.

छपरा से आदर्श गुप्ता की रिपोर्ट

Saran Flood Update : सारण जिले में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है. रिविलगंज प्रखंड के दिलिया रहीमपुर पंचायत में बाढ़ का ऐसा खौफनाक मंजर सामने आया है, जहां सड़क और घरों के बीच का फर्क मिट गया है. जिस रास्ते से कुछ दिन पहले तक लोग पैदल और वाहनों से गुजरते थे, आज उसी सड़क पर गर्दन तक पानी जमा है.

गर्दन तक पानी में डूबी महिला, घर से सामान लाने की मजबूरी

दिलिया रहीमपुर का एक वीडियो बाढ़ की भयावह स्थिति को सामने ला रहा है. वीडियो में एक महिला गर्दन तक पानी में डूबी हुई अपने घर की ओर जाती दिखाई दे रही है. बताया जा रहा है कि महिला का घर भी बाढ़ के पानी में डूब चुका है और वहां कुछ जरूरी सामान छूट गया है. इसी सामान को लेने के लिए उसे जान जोखिम में डालकर गहरे पानी में उतरना पड़ा.

यह इलाका साधू लाल पृथ्वीचंद स्कूल के सामने का है. सड़क के एक तरफ छपरा नगर निगम क्षेत्र में आने वाला स्कूल है, जबकि दूसरी तरफ दिलिया रहीमपुर पंचायत का धियारा इलाका है. बाढ़ का पानी अब सड़क से लेकर घरों तक फैल चुका है.

ऊंची सड़क भी डूबी, घरों में घुसा बाढ़ का पानी

स्थानीय लोगों के अनुसार, यह सड़क आसपास की जमीन से पहले ही ऊंचाई पर बनी हुई है. इसके बावजूद बाढ़ का पानी सड़क को पूरी तरह डुबो चुका है. कई ऐसे घर भी पानी की चपेट में आ गए हैं, जिन्हें लोगों ने आसपास की जमीन से ऊंचाई पर बनाया था.

सड़क से लेकर घरों तक हर तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है. हालात ऐसे हैं कि जरूरी काम के लिए भी ग्रामीणों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है.

घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर रहने को मजबूर परिवार

बाढ़ के कारण दिलिया रहीमपुर समेत प्रभावित इलाकों में कई परिवारों को अपना घर छोड़ना पड़ा है. कुछ लोग तिरपाल लगाकर तो कुछ सड़क किनारे अस्थायी ठिकाना बनाकर रह रहे हैं. पीने के साफ पानी, भोजन, बिजली और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर लोगों की परेशानी बढ़ गई है.

बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने के साथ मवेशियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना भी बड़ी चुनौती बनी हुई है.

सारण के 93 गांवों में बाढ़ का असर

जिला प्रशासन के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सारण के 7 प्रखंडों की 33 पंचायतों के 93 गांव बाढ़ की चपेट में हैं. जिले में 2,05,849 से अधिक लोग बाढ़ से सीधे प्रभावित हुए हैं. कई इलाकों में घरों में पानी घुसने से लोगों की परेशानी बढ़ी है, वहीं खेती और रोजमर्रा की आजीविका पर भी इसका असर पड़ा है.

दिघवारा में माही नदी का तटबंध टूटा

दिघवारा प्रखंड में शनिवार, 5 सितंबर की सुबह करीब 5:30 बजे माही नदी के दायें तटबंध का करीब 12 मीटर हिस्सा पानी के अत्यधिक दबाव के कारण टूट गया. तटबंध टूटने के बाद पानी तेजी से रिहाइशी इलाकों की ओर फैलने लगा, जिससे दिघवारा क्षेत्र की तीन पंचायतें प्रभावित हुईं.

सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग की तकनीकी टीम मौके पर पहुंची. मुख्य अभियंता, कार्यपालक अभियंता और सहायक अभियंता की निगरानी में तटबंध की मरम्मत का काम युद्धस्तर पर चलाया गया.

SDRF-NDRF की टीमें राहत और बचाव में जुटीं

प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम जारी है. अकिलपुर पंचायत में नावों का परिचालन किया जा रहा है. मौके पर SDRF और NDRF की टीमें भी राहत एवं बचाव कार्य में लगी हैं.

सोनपुर में सबसे ज्यादा लोग प्रभावित

प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक सोनपुर प्रखंड सबसे अधिक प्रभावित है. यहां 16 पंचायतों के 65 गांवों में करीब 1.30 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं.

सदर छपरा प्रखंड में 9 गांवों की 54,328 आबादी प्रभावित है. दिघवारा में 11 गांवों की 17,442 आबादी बाढ़ से प्रभावित बतायी गयी है. इसके अलावा गड़खा में 4 गांवों की 1,179 आबादी, रिविलगंज नगर पंचायत में करीब 2,000, दरियापुर में 3 गांवों की 600 और मकेर के बाघाकोल पंचायत में एक गांव की करीब 300 आबादी प्रभावित है.

119 नाव और 6 बोट एंबुलेंस तैनात

बाढ़ प्रभावित लोगों की आवाजाही और रेस्क्यू के लिए प्रशासन ने 119 साधारण नावों के साथ 6 बोट एंबुलेंस तैनात की हैं. बोट एंबुलेंस और मोबाइल मेडिकल टीमों की मदद से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में एक सुरक्षित प्रसव भी कराया गया है.

19 मेडिकल टीमें लगातार कर रहीं काम

स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रखने के लिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 19 मेडिकल टीमें तैनात की गयी हैं. इनमें सदर छपरा में 6, सोनपुर में 6, दिघवारा में 3, रिविलगंज में 3 और मकेर में 1 मेडिकल टीम शामिल है.

377 मवेशियों को सुरक्षित पहुंचाया गया

बाढ़ के बीच पशुओं की सुरक्षा के लिए भी प्रशासन ने इंतजाम किए हैं. अब तक 377 मवेशियों को सुरक्षित पशु आश्रय स्थलों तक पहुंचाया गया है.

सोनपुर में सामुदायिक रसोई शुरू

बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए सोनपुर में सामुदायिक रसोई शुरू की गयी है. यहां अब तक 1,056 से अधिक लोगों को भोजन कराया जा चुका है. प्रभावित परिवारों के बीच पॉलिथीन शीट, सूखा राशन और अन्य जरूरी राहत सामग्री भी वितरित की जा रही है.

24 घंटे सक्रिय है कंट्रोल रूम

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने 24 घंटे कंट्रोल रूम सक्रिय किया है. प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और अफवाहों पर ध्यान न दें. प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य के साथ जलस्तर और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है.

तस्वीर बता रही है बाढ़ की असली मजबूरी

दिलिया रहीमपुर की गर्दन तक पानी में डूबी महिला की तस्वीर सिर्फ एक जलमग्न सड़क की कहानी नहीं है. यह उन परिवारों की मजबूरी दिखाती है, जिनके घर बाढ़ में डूब चुके हैं, लेकिन जिंदगी की जरूरी चीजें अभी भी उन्हीं घरों में छूटी हुई हैं.

जिस सड़क पर कुछ दिन पहले तक सामान्य आवाजाही होती थी, आज वहां गर्दन तक पानी है. घर डूबे हैं, रास्ते डूबे हैं और लोग जरूरी सामान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर पानी में उतरने को मजबूर हैं.

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By विवेक सिंह

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