Sachidanand Rai: आरक्षण व्यवस्था की समय-समय पर समीक्षा को लेकर सारण स्थानीय प्राधिकार के एमएलसी सच्चिदानंद राय के फेसबुक पोस्ट से राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गयी है. उन्होंने आरक्षण व्यवस्था की निष्पक्ष समीक्षा की जरूरत पर सवाल उठाया है.
एमएलसी ने सवाल किया कि सांसद, विधायक, आइएएस-आइपीएस समेत उच्च पदों पर पहुंच चुके परिवारों की अगली पीढ़ी को भी वही आरक्षण लाभ क्यों मिलना चाहिए, जो समाज के अत्यंत गरीब, पिछड़े और सुविधाविहीन परिवारों के बच्चों को मिलना चाहिए.
उन्होंने कहा कि यदि किसी परिवार की एक-दो पीढ़ियां सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से मजबूत हो चुकी हैं तथा परिवार के सदस्य सत्ता और प्रशासन के महत्वपूर्ण पदों तक पहुंच चुके हैं, तो क्या उनकी अगली पीढ़ी और उसी समुदाय के गरीब मजदूर, भूमिहीन किसान या संसाधनविहीन परिवार के बच्चों को अवसर की दृष्टि से एक समान माना जाना उचित है.
आरक्षण का विरोध नहीं, समीक्षा की मांग
सच्चिदानंद राय का कहना है कि आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की बात करना आरक्षण का विरोध नहीं है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि सामाजिक न्याय की व्यवस्था का लाभ समाज के सबसे वंचित और जरूरतमंद लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंचे.
उन्होंने कहा कि समय के साथ परिवारों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति बदलती है. ऐसे में आरक्षण व्यवस्था की तथ्यपरक समीक्षा जरूरी हो सकती है. उनके इस सवाल ने सोशल मीडिया पर नयी बहस छेड़ दी है.
खुले मन से चर्चा की अपील
एमएलसी ने कहा कि आरक्षण व्यवस्था सामाजिक न्याय से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है. इसलिए इसकी निष्पक्ष समीक्षा को लेकर तथ्यों और जरूरत के आधार पर चर्चा होनी चाहिए. उन्होंने सवाल किया कि आरक्षण की निष्पक्ष समीक्षा पर खुले मन से चर्चा करने में आखिर आपत्ति क्यों होनी चाहिए.
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