Saran News : पीडीएस दुकानदार की हत्या व सीएसपी लूट के मामले में पुलिस के हाथ खाली

पीडीएस दुकानदार की हत्या और सीएसपी संचालक से एक लाख 85 हजार रुपये की लूट के मामलों में पुलिस के हाथ अब भी खाली हैं.

By SHAH ABID HUSSAIN | January 14, 2026 9:09 PM

मांझी. मांझी में तीन माह पूर्व हुई पीडीएस दुकानदार बलिराम यादव की हत्या और नगर पंचायत के दक्षिण टोला निवासी सूरज प्रसाद की हत्या तथा सीएसपी संचालक अजीत कुमार सिंह से एक लाख 85 हजार रुपये की लूट के मामलों में पुलिस के हाथ अब भी खाली हैं. दोनों हत्याओं के अलावा सीएसपी लूट मामले में किसी भी अपराधी की गिरफ्तारी नहीं होने से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं. सात जनवरी को मांझी-दरौली मुख्य मार्ग पर मटियार गांव स्थित भारतीय स्टेट बैंक के सीएसपी से तीन अपराधियों ने बेखौफ लूट की थी. इस मामले में सीएसपी संचालक ने अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी थी. पुलिस को शक है कि लूट में शामिल बदमाश स्थानीय हो सकते हैं, क्योंकि घटना के बाद अपराधी मुख्य मार्ग से डेढ़ किलोमीटर आगे जाकर ग्रामीण सड़क में प्रवेश कर गये और किसी के घर में पनाह ले ली होगी. पुलिस ने सभी संभावित इलाकों को चिन्हित कर छापेमारी शुरू कर दी है. साथ ही, सीएसपी संचालक द्वारा बताए गए अपराधियों के हुलिया, हेयरस्टाइल और चाल-ढाल का अध्ययन किया जा रहा है. घटना में प्रयुक्त बाइक पर भी पुलिस की निगाह है. 13 अक्तूबर, 2025 को जन वितरण दुकानदार बलिराम यादव की घर के बाहर सोते समय हत्या कर दी गयी थी. इस मामले में मृतक की पत्नी प्रभावती देवी के बयान पर अज्ञात अपराधियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. तीन महीने बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं. 10 दिसंबर को नगर पंचायत के दक्षिण टोला में सूरज प्रसाद की हत्या उनके प्राइवेट पार्ट काटकर की गयी थी. मृतक के पुत्र रजनीश कुमार गुप्ता ने अज्ञात अपराधियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी थी, लेकिन इस मामले में भी अभी तक गिरफ्तारी नहीं हो पायी है. प्रशिक्षु डीएसपी सह थानाध्यक्ष मांझी देव आशीष हंस ने बताया कि सीएसपी लूटकांड में मोबाइल सीडीआर सहित कई तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच की जा रही है. उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही लूटकांड का उद्भेदन कर अपराधियों को गिरफ्तार किया जायेगा. मामलों की जटिलता और स्थानीय इलाकों में अपराधियों की सक्रियता से पुलिस के लिए खुलासा चुनौतीपूर्ण बना हुआ है, लेकिन लगातार छानबीन और तकनीकी अनुसंधान के जरिये अपराधियों तक पहुंचने का प्रयास जारी है.

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