PHOTO: आस्था से लेकर लोक संस्कृति तक, आखिर क्यों खास है सोनपुर मेला? 6 तस्वीरों में जानिए

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PHOTO: आस्था से लेकर लोक संस्कृति तक, आखिर क्यों खास है सोनपुर मेला? 6 तस्वीरों में जानिए
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मेले की तस्वीर

गंगा-गंडक संगम पर लगने वाला सोनपुर मेला आस्था, परंपरा और रोमांच का संगम है. हरिहरनाथ मंदिर की पूजा से लेकर पशु बाजार और लोक कला तक, यह मेला अपनी अनूठी पहचान बनाए हुए है.

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आस्था, परंपरा

आस्था, परंपरा और रोमांच का संगम

गंगा और गंडक नदी के संगम पर लगने वाला सोनपुर मेला बिहार की समृद्ध लोक परंपरा और संस्कृति की अनोखी पहचान है, सदियों पुराना यह मेला आज भी अपनी ऐतिहासिक विरासत, धार्मिक आस्था और रंग-बिरंगी रौनक के लिए देशभर में प्रसिद्ध है, दूर-दूर से लोग यहां खरीदारी, मनोरंजन और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं, मेले में सजी दुकानें, झूले, लोक कला, पारंपरिक खान-पान और पशु बाजार इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं, आस्था और मनोरंजन के इस संगम में हर उम्र के लोगों के लिए कुछ न कुछ खास देखने को मिलता है.

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हरिहरनाथ मंदिर

हरिहरनाथ मंदिर में उमड़ती आस्था

मेले की शुरुआत और धार्मिक महत्व हरिहरनाथ मंदिर से जुड़ा है, मान्यता है कि यहां भगवान विष्णु और भगवान शिव के हरिहर स्वरूप की पूजा करने से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर गंगा और गंडक के संगम पर पवित्र स्नान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, इसके बाद हरिहरनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं, मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की भीड़ और धार्मिक जयकारों से माहौल भक्तिमय बना रहता है.

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पशु मेले की तस्वीर

पशु मेले की पुरानी पहचान

सोनपुर मेला ऐतिहासिक रूप से पशु व्यापार के लिए प्रसिद्ध रहा है, कभी यहां हाथी, घोड़े और अन्य पशुओं की खरीद-बिक्री प्रमुख आकर्षण हुआ करती थी, खासकर हाथियों की मौजूदगी ने इस मेले को देश-दुनिया में अलग पहचान दिलाई, मेले में दूर-दराज से व्यापारी और पशुपालक अपने पशुओं के साथ पहुंचते थे, समय के साथ पशु व्यापार का स्वरूप बदला है, लेकिन मेले की ऐतिहासिक पहचान और पशु बाजार की परंपरा आज भी इसकी खासियत बनी हुई है.

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झूले की तस्वीर

झूले और मनोरंजन का रोमांच

बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए मेले में मनोरंजन के कई साधन मौजूद रहते हैं, बड़े-बड़े झूले, मौत का कुआं, तरह-तरह के खेल और मनोरंजन के आकर्षक साधन लोगों को अपनी ओर खींचते हैं, खासकर बच्चों में झूलों और खेलों को लेकर खासा उत्साह देखने को मिलता है, शाम होते ही रंग-बिरंगी रोशनी से सजे झूले और मनोरंजन स्थल मेले की रौनक को और बढ़ा देते हैं, परिवार के साथ पहुंचे लोग यहां मनोरंजन के साथ यादगार पलों को भी अपने कैमरे में कैद करते हैं.

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सोनपुर मेले में दिखती हस्तशिल्प

सोनपुर मेले में दिखती हस्तशिल्प और लोक कला की झलक

इस तस्वीर में सोनपुर मेले में महिलाएं और ग्रामीण कलाकार पारंपरिक हस्तशिल्प से तैयार सजावटी सामान बेचती नजर आ रही हैं, रंग-बिरंगे बांस और घास से बने टोकरियां, डिब्बे और सजावटी वस्तुएं मेले की लोक कला और ग्रामीण हुनर को दर्शाती हैं, स्थानीय कारीगरों के हाथों से तैयार ये सामान सोनपुर मेले की पारंपरिक पहचान और बिहार की समृद्ध हस्तशिल्प संस्कृति की खूबसूरत झलक पेश करते हैं, मेले में ऐसे स्टॉल ग्रामीण कलाकारों को अपनी कला और उत्पाद लोगों तक पहुंचाने का मंच भी देते हैं.

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लोक संस्कृति की तस्वीर

लोक संस्कृति की दिखती झलक

सोनपुर मेले में बिहार की लोक कला, संगीत और पारंपरिक संस्कृति की शानदार झलक देखने को मिलती है, मेले के विभिन्न मंचों पर लोक कलाकार पारंपरिक गीत, संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से लोगों का मनोरंजन करते हैं, ढोलक और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन माहौल को और जीवंत बना देती है, कलाकारों की प्रस्तुतियों में बिहार की मिट्टी की खुशबू और लोक जीवन की झलक साफ दिखाई देती है, यही सांस्कृतिक रंग सोनपुर मेले को दूसरे मेलों से अलग और खास बनाता है.

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लेखक के बारे में

By विवेक पाण्डेय

विवेक रंजन पाण्डेय पिछले 8 वर्षों से मुख्यधारा की पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें बिहार की राजनीति, प्रशासन, अपराध, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सरोकार और स्थानीय-क्षेत्रीय मुद्दों की गहरी समझ है. खबरों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए वे तथ्यों की पुष्टि और विभिन्न स्रोतों से जानकारी का सत्यापन करने को प्राथमिकता देते हैं.

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विवेक रंजन पाण्डेय की विशेष रुचि बिहार की राजनीति, ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम अपडेट, प्रशासनिक गतिविधियों, चुनाव, अपराध, मौसम, शिक्षा तथा रिसर्च आधारित खबरों में है. वे लाइव कवरेज, एक्सक्लूसिव स्टोरी, SEO फ्रेंडली डिजिटल कंटेंट और डेटा आधारित रिपोर्टिंग में भी दक्ष हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, विशेषकर एक्स पर सक्रिय रहकर ट्रेंडिंग और महत्वपूर्ण घटनाक्रमों पर लगातार नजर बनाए रखते हैं.

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पत्रकारिता के क्षेत्र में विवेक रंजन पाण्डेय का आठ वर्षों का अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत टीवी और डिजिटल मीडिया से की तथा विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए रिपोर्टिंग, डिजिटल कंटेंट लेखन, लाइव कवरेज, हेडलाइन लेखन, ब्रेकिंग न्यूज, फैक्ट चेकिंग में विशेषज्ञता हासिल की. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल के लिए बिहार से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों का लेखन और विश्लेषण कर रहे हैं.

शिक्षा

विवेक रंजन पाण्डेय ने आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी, पटना से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) की डिग्री प्राप्त की है. पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, मीडिया एथिक्स, डिजिटल जर्नलिज्म और जनसंचार के विभिन्न आयामों का अध्ययन किया.

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