Saran News: ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में सारण जिले में एक और महत्वपूर्ण पहल की जा रही है. मुख्यमंत्री सात निश्चय-3 के तहत जिले के 11 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में ब्लड स्टोरेज यूनिट यानी रक्त संग्रह केंद्र स्थापित किये जायेंगे. इससे प्रसव के दौरान रक्त की जरूरत पड़ने वाली महिलाओं, गंभीर एनीमिया से पीड़ित मरीजों और अन्य आपात स्थिति वाले रोगियों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.
अभी रक्त की जरूरत पड़ने पर ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों और उनके परिजनों को कई बार जिला अस्पताल या बड़े स्वास्थ्य संस्थानों का रुख करना पड़ता है. नये ब्लड स्टोरेज यूनिट शुरू होने के बाद स्थानीय स्तर पर ही रक्त उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत होगी. इससे खासकर सिजेरियन प्रसव और गंभीर एनीमिया के मामलों में समय पर उपचार मिल सकेगा और मरीजों को अनावश्यक रूप से इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा.
11 सीएचसी में स्थापित होगा ब्लड स्टोरेज यूनिट
स्वास्थ्य विभाग ने जिले के 11 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को ब्लड स्टोरेज यूनिट की स्थापना के लिए चिन्हित किया है. इनमें दिघवारा, मांझी, परसा, अमनौर, एकमा, गड़खा, इसुआपुर, जलालपुर, मशरक, नगरा और रिविलगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं.
इन केंद्रों पर रक्त संग्रह और जरूरत के समय उसे उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जायेगी. इससे दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले मरीजों को आपात स्थिति में काफी राहत मिलने की उम्मीद है.
चार स्वास्थ्य संस्थानों में पहले से सुविधा
जिले के कुछ स्वास्थ्य संस्थानों में पहले से ही ब्लड स्टोरेज यूनिट संचालित हैं. मढ़ौरा और सोनपुर अनुमंडलीय अस्पताल के अलावा दरियापुर और बनियापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रक्त संग्रह की सुविधा उपलब्ध है.
इन स्वास्थ्य संस्थानों में सिजेरियन प्रसव की सुविधा भी उपलब्ध करायी जा रही है. ऐसे में प्रसव के दौरान रक्त की आवश्यकता होने पर स्थानीय स्तर पर इसकी उपलब्धता मरीजों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रही है.
प्रसव के दौरान खून की कमी से निपटने में मिलेगी मदद
मातृ स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए रक्त की समय पर उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है. प्रसव के दौरान अधिक रक्तस्राव होने या महिला में पहले से गंभीर एनीमिया होने की स्थिति में तत्काल रक्त की आवश्यकता पड़ सकती है.
ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों पर ब्लड स्टोरेज यूनिट की सुविधा उपलब्ध होने से ऐसी आपात परिस्थितियों में मरीज को दूसरे अस्पताल रेफर करने से पहले आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी. इससे प्रसव सेवाओं को सुरक्षित बनाने और मातृ मृत्यु के जोखिम को कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है.
गंभीर एनीमिया के मरीजों को भी राहत
ब्लड स्टोरेज यूनिट का लाभ केवल प्रसव पीड़ित महिलाओं तक सीमित नहीं रहेगा. गंभीर एनीमिया से पीड़ित मरीजों को भी चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार रक्त उपलब्ध कराने में सुविधा होगी.
स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य है कि गंभीर मरीजों को समय पर आवश्यक चिकित्सा सहायता मिल सके और रक्त की उपलब्धता के अभाव में उपचार में देरी की स्थिति उत्पन्न न हो.
सदर अस्पताल पर कम होगा दबाव
ग्रामीण क्षेत्रों में ब्लड स्टोरेज यूनिट शुरू होने से छपरा सदर अस्पताल पर मरीजों की निर्भरता भी कम होने की उम्मीद है. अभी आसपास के कई क्षेत्रों से मरीजों को रक्त की जरूरत होने पर जिला मुख्यालय तक आना पड़ता है. इससे मरीज और उनके परिजनों को अतिरिक्त समय और खर्च उठाना पड़ता है.
स्थानीय स्तर पर सुविधा मिलने से मरीजों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर ही आवश्यक आपातकालीन सहायता उपलब्ध हो सकेगी. इससे जिला अस्पताल में मरीजों का दबाव कम करने में भी मदद मिलेगी.
चरणबद्ध तरीके से शुरू होगी सिजेरियन प्रसव की सुविधा
जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम अरविंद कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सुविधाओं को चरणबद्ध तरीके से मजबूत किया जा रहा है. इसी क्रम में चयनित स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक संसाधन और व्यवस्थाएं विकसित की जायेंगी.
उन्होंने बताया कि जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सिजेरियन प्रसव की सुविधा भी चरणबद्ध तरीके से शुरू की जायेगी. ब्लड स्टोरेज यूनिट की उपलब्धता इस दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार करेगी.
ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था होगी और मजबूत
स्वास्थ्य विभाग का जोर अब जिला मुख्यालय के साथ-साथ प्रखंड और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने पर है. डायलिसिस, पैथोलॉजी जांच, प्रसव सेवाओं और अब रक्त संग्रह केंद्र जैसी सुविधाओं के विस्तार से ग्रामीण मरीजों को अपने आसपास ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है.
11 नये ब्लड स्टोरेज यूनिट शुरू होने के बाद जिले के बड़े ग्रामीण क्षेत्र में रक्त की उपलब्धता का नेटवर्क मजबूत होगा. खासकर प्रसव, गंभीर एनीमिया और अन्य आपात स्थितियों में इसका सीधा लाभ मरीजों को मिलने की उम्मीद है.
