सारण नगर निगम में महापौर को बड़ा झटका, 6 पार्षदों का निलंबन नियम विरुद्ध; बोर्ड बैठक स्थगित

सारण नगर निगम में छह पार्षदों के निलंबन पर नगर विकास विभाग ने सवाल उठाया है. अवर सचिव ने 3 दिनों में साक्ष्य मांगा और 31 जुलाई की बोर्ड बैठक स्थगित कर दी.

सारण: सारण नगर निगम की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा मोड़ आ गया. नगर निगम के महापौर लक्ष्मी नारायण गुप्ता की ओर से छह पार्षदों को 60 दिनों के लिए निलंबित किए जाने के मामले में नगर विकास एवं आवास विभाग ने कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं. विभाग के अवर सचिव रणविजय कुमार ने प्रथम दृष्टया इस कार्रवाई को विधि सम्मत नहीं माना है.

विभाग ने महापौर से तीन दिनों के भीतर निलंबन की कार्रवाई से जुड़े तथ्यात्मक साक्ष्य उपलब्ध कराने को कहा है. इतना ही नहीं, विभागीय निर्णय आने तक महापौर द्वारा 31 जुलाई को बुलाई गई नगर निगम बोर्ड की बैठक को भी स्थगित कर दिया गया है. विभाग के इस आदेश के बाद महापौर के विरोधी खेमे में खुशी का माहौल है.

क्या है पूरा मामला?

बताया जाता है कि 22 जुलाई को नगर निगम बोर्ड की बैठक के बाद महापौर ने छह पार्षदों को कथित रूप से भारी उत्पाती, अलोकतांत्रिक और गैर जिम्मेदाराना आचरण तथा बैठक में अव्यवस्था उत्पन्न करने के आरोप में 60 दिनों के लिए निगम की बैठकों से निलंबित कर दिया था.

इसके बाद उपमहापौर रागिनी कुमारी समेत अन्य पार्षदों ने नगर विकास एवं आवास विभाग को पत्र भेजकर निलंबन की कार्रवाई को बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 के प्रावधानों के विपरीत बताया. पार्षदों ने निलंबन पर तत्काल रोक लगाने, संबंधित पार्षदों को अपना पक्ष रखने का अवसर देने और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी.

नियमों के पालन पर विभाग ने उठाये सवाल

नगर विकास एवं आवास विभाग के अवर सचिव रणविजय कुमार की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि छह पार्षदों के निलंबन आदेश से यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि कार्रवाई से पहले बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 की धारा 52(2) और 52(3) के प्रावधानों का पूर्ण रूप से पालन किया गया या नहीं.

विभाग ने यह भी पूछा है कि संबंधित पार्षदों को पहले बैठक से हटाया गया था या नहीं, उन्हें दूसरी बार चेतावनी दी गयी थी या नहीं और क्या उनके द्वारा बार-बार गंभीर अव्यवस्था उत्पन्न करने के कोई साक्ष्य मौजूद हैं.

विभाग के अनुसार किसी पार्षद को निलंबित करने से पहले अधिनियम में निर्धारित विभिन्न चरणों का पालन किया जाना आवश्यक है. इन बिंदुओं से संबंधित कोई स्पष्ट साक्ष्य निलंबन आदेश में उपलब्ध नहीं कराया गया है. इसलिए प्रथम दृष्टया कार्रवाई विधि सम्मत प्रतीत नहीं होती.

विभाग ने महापौर से स्थिति स्पष्ट करते हुए तीन दिनों के भीतर तथ्यात्मक साक्ष्य उपलब्ध कराने को कहा है.

31 जुलाई की बोर्ड बैठक भी स्थगित

छह पार्षदों के निलंबन पर जवाब मांगने के साथ ही नगर विकास विभाग ने महापौर को दूसरा झटका दिया है. विभाग ने 31 जुलाई को प्रस्तावित नगर निगम बोर्ड की बैठक को भी स्थगित कर दिया है.

विभाग ने अपने पत्र में कहा है कि छह पार्षदों के निलंबन के मामले में महापौर से तीन दिनों के भीतर प्रतिवेदन मांगा गया है. ऐसे में विभागीय निर्णय आने तक प्रस्तावित बोर्ड बैठक को स्थगित किया जाता है.

इस फैसले के बाद नगर निगम की राजनीति और गरमा गयी है.

पार्षद एकता मंच ने बताया न्याय की जीत

नगर विकास विभाग का आदेश सामने आने के बाद महापौर से नाराज पार्षदों में खुशी का माहौल है. पार्षद एकता मंच से जुड़े सदस्यों ने इसे अपनी बड़ी जीत बताते हुए कहा कि यह न्याय की जीत और अन्याय की हार है.

विरोधी पार्षदों का कहना है कि किसी भी जनप्रतिनिधि के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए. उनका आरोप है कि छह पार्षदों के निलंबन में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया.

क्या बोलीं उपमहापौर?

नगर निगम की उपमहापौर रागिनी देवी ने कहा कि महापौर की ओर से की गयी कार्रवाई नियम के विरुद्ध है. उन्होंने कहा कि यदि किसी पार्षद से गलती हुई थी तो पहले संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत किये जाने चाहिए थे और नियमानुसार चेतावनी दी जानी चाहिए थी. इसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जानी चाहिए थी.

उन्होंने कहा कि नियमों का पालन किये बिना सीधे निलंबन की कार्रवाई करना उचित नहीं है.

महापौर बोले- मेरे पास सारे साक्ष्य

वहीं, महापौर लक्ष्मी नारायण गुप्ता ने विभाग के आदेश पर कहा कि जो भी आदेश आया है, उसका जवाब दिया जाएगा. उन्होंने दावा किया कि उनके पास निलंबन से संबंधित सभी साक्ष्य मौजूद हैं.

महापौर ने कहा कि विभाग के हर सवाल का बिंदुवार जवाब दिया जाएगा और इस संबंध में नगर आयुक्त को आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित कर दिया गया है.

अब विभाग के जवाब पर टिकी निगाह

नगर विकास विभाग के आदेश के बाद अब छपरा नगर निगम की आगे की कार्रवाई महापौर की ओर से उपलब्ध कराये जाने वाले साक्ष्यों और विभाग के अगले निर्णय पर निर्भर करेगी.

एक ओर छह पार्षदों का निलंबन विवाद में है, वहीं दूसरी ओर बोर्ड की बैठक भी स्थगित हो चुकी है. ऐसे में छपरा नगर निगम में महापौर और पार्षदों के बीच चल रहा विवाद आने वाले दिनों में और गहरा सकता है.

Also Read: पीके के सामने थाने में क्यों भिड़ गए जन सुराज के दो सीनियर नेता? पूर्व डीजी आरके मिश्रा ने किशोर मुन्ना को लगाई फटकार, VIDEO वायरल


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By संजय भारद्वाज

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >