सज गया पतंगों का बाजार, पांच रुपये की दिलवाली से लेकर 250 के दिलबाज तक उपलब्ध
आधुनिकता के दौर में भी बरकरार है पतंगबाजी का क्रेज, बेंगलुरु व गुजरात से आये हैं धागे, वजन के हिसाब से बिक्री
छपरा. आधुनिकता के बीच आज भी बच्चों और युवाओं में पतंगबाजी का क्रेज बरकरार है. पतंग उड़ाने को लेकर गांव से लेकर शहर तक बच्चों से युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है. इसी उत्साह को बनाए रखने के लिए शहर के कई दुकानदारों ने इस वर्ष भी डिजाइनर पतंगें और लोकल निर्मित धागे मंगाए हैं. इसके अलावा बेंगलुरु और गुजरात से भी धागे मंगाये गये हैं, जिनकी बिक्री वजन के हिसाब से की जा रही है. बाजार में हैंडमेड पतंगें भी उपलब्ध हैं. वहीं, पटना, समस्तीपुर और बलिया से भी विभिन्न प्रकार की पतंगें मंगाई गई हैं.
शहर में पतंगों के लिए लगायी गयी छोटी-छोटी दुकानों पर पांच रुपये से लेकर 250 रुपये तक की आकर्षक पतंगें उपलब्ध हैं. पांच रुपये की दिलवाली पतंग से लेकर 250 रुपये की दिलबाज पतंग तक की बिक्री हो रही है. 10 रुपये की स्मार्ट काइट की मांग सबसे अधिक है. बाज ब्रांड, प्लास्टिक की हैंडमेड पतंग, आरी, अधियल, पवन तथा अद्धा ब्रांड की लोकल पतंगों के भी काफी खरीदार हैं. सबसे कम कीमत में कागज की तीन रुपये की पतंग उपलब्ध है, जबकि कपड़े से बनी चमगादर और बाज पतंग 200 से 250 रुपये तक बेची जा रही है.कई जगहों पर होंगी पतंगबाजी की प्रतियोगिता
शहर के राजेंद्र स्टेडियम के अलावा कई मोहल्लों में युवा एकजुट होकर पतंगबाजी की प्रतियोगिताएं आयोजित करेंगे. शहर के दहियांवा, नई बाजार, साहेबगंज, सोनार पट्टी, मोहन नगर और गुदरी इलाकों में पतंगबाजी का खासा क्रेज देखने को मिल रहा है. इन इलाकों में बच्चे और युवा दिनभर छतों पर पतंग उड़ाते नजर आ रहे हैं. शहर के खुले मैदानों में भी पतंगबाज जुट रहे हैं. मकर संक्रांति के दिन पतंगबाजी को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं. बाजार में चाइनीज धागे की बिक्री नहीं हो रही है. अब चाइनीज धागे की जगह स्वदेशी मांझा ने ले ली है. 400 रुपये प्रति किलो की दर से रेडीमेड स्वदेशी मांझा बच्चों की पहली पसंद बन गया है.शहर के सोनार पट्टी स्थित पतंग दुकानदार सोनू गुप्ता ने बताया कि इस बार बाजार में स्वदेशी धागों की बिक्री अधिक हो रही है. इससे किसी तरह का खतरा नहीं होता है. यह प्लास्टिक का नहीं होता, जिस कारण पर्यावरण को भी इससे नुकसान नहीं पहुंचाता है.
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