Saran News : गंगा सिंह कॉलेज, छपरा के हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. कमाल अहमद ने 27 जून 2026 से रोके गये अपने संपूर्ण वेतन के भुगतान की मांग को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को आवेदन दिया है. उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से वेतन रोकने की कार्रवाई की विधिसम्मत समीक्षा करने और बकाया वेतन का तत्काल भुगतान सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है.
बिना निलंबन के पूरा वेतन रोकने पर उठाया सवाल
डॉ. कमाल अहमद ने अपने आवेदन में कहा है कि उन्हें न तो निलंबित किया गया है, न सेवा से हटाया या बर्खास्त किया गया है और न ही उनके विरुद्ध कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित है. इसके बावजूद 27 जून से उनका पूरा वेतन रोक दिया गया है.
उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि बिना निलंबन अथवा किसी निष्कर्षित अनुशासनात्मक कार्यवाही के नियमित शिक्षक का 100 प्रतिशत वेतन रोकने के लिए किस विशिष्ट वैधानिक प्रावधान को लागू किया गया है.
नवसृजित कॉलेज में प्रतिनियुक्ति को हाइकोर्ट में दी चुनौती
डॉ. अहमद के अनुसार विश्वविद्यालय की ओर से नोटिफिकेशन के माध्यम से उनकी सहमति के बिना उन्हें नवसृजित राजकीय डिग्री कॉलेज में शिक्षक सह अर्थपाल के रूप में प्रतिनियुक्त किया गया था. उन्होंने इस प्रतिनियुक्ति को पटना हाइकोर्ट में रिट याचिका के माध्यम से चुनौती दी है.
उनका कहना है कि विवादित प्रतिनियुक्ति में योगदान नहीं करने को आधार बनाकर उनका पूरा वेतन रोक दिया गया. जबकि उनका मूल पदस्थापन गंगा सिंह कॉलेज, छपरा में है और वह वहीं अपनी सेवा देने के लिए उपलब्ध हैं.
कुलसचिव के आधिकारिक इमेल पर भेजते रहे उपस्थिति की सूचना
डॉ. अहमद ने आवेदन में कहा है कि वह प्रत्येक कार्यदिवस अपनी उपस्थिति की सूचना जय प्रकाश विश्वविद्यालय के कुलसचिव के आधिकारिक इमेल पर भेजते रहे हैं. उनके अनुसार गंगा सिंह कॉलेज की ओर से विश्वविद्यालय को भेजे जाने वाले नियमित वेतन विपत्र में उनका नाम और वेतन भी शामिल किया जाता रहा है.
उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से इस तथ्य को भी ध्यान में रखते हुए वेतन रोकने के मामले की समीक्षा करने का अनुरोध किया है.
न्यायालय के निर्णय का भी दिया हवाला
डॉ. कमाल अहमद ने अपने आवेदन में दावा किया है कि नवसृजित राजकीय डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति और उससे जुड़ी उपस्थिति एवं वेतन रोकने जैसी परिणामी कार्रवाई के मामले में न्यायालय की ओर से आदेश पारित किया गया है.
उन्होंने उल्लेख किया है कि संबंधित परिणामी आदेश में उनका नाम भी शामिल है. इसी आधार पर उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से अपने मामले पर उक्त न्यायिक निर्णय के आलोक में विधिसम्मत निर्णय लेने का अनुरोध किया है.
उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से रोका गया पूरा वेतन और बकाया राशि तत्काल जारी करने की मांग की है.
