पहाड़ पर बढ़ती आबादी से वर्ष 2100 तक दार्जिलिंग में बारूद के ढेर पर होगी जिंदगी

सुंदर वादियों के लिए मशहूर दार्जिलिंग हिमालय क्षेत्र भविष्य में विनाशकारी भूस्खलनों का केंद्र बन सकता है.

गया जी.

सुंदर वादियों के लिए मशहूर दार्जिलिंग हिमालय क्षेत्र भविष्य में विनाशकारी भूस्खलनों का केंद्र बन सकता है. यह डराने वाली चेतावनी सीयूएसबी और पुर्तगाल की लिस्बन यूनिवर्सिटी के संयुक्त शोध में सामने आयी है. शोधकर्ताओं ने आगाह किया है कि जिस रफ्तार से जलवायु परिवर्तन हो रहा है और पहाड़ों पर आबादी का बोझ बढ़ रहा है, उससे वर्ष 2050 और 2100 तक यहां भूस्खलन का खतरा और जनहानि का जोखिम कई गुना बढ़ जायेगा. पहाड़ों पर अनियोजित विकास बना नासूर: टीम लीडर डॉ सोमनाथ बेरा ने स्पष्ट किया कि भारत के अधिकांश पर्वतीय शहरों में बेतरतीब और अनियोजित बसावट हुई है. यही कारण है कि जलवायु परिवर्तन का असर यहां सबसे ज्यादा और घातक होगा. शोध में पाया गया है कि बदलता वर्षा पैटर्न और सामाजिक-आर्थिक बदलाव मिलकर आने वाले दशकों में आपदा का रूप ले लेंगे.

कुलपति ने जतायी चिंता, तुरंत जागने की जरूरत:

सीयूएसबी के कुलपति प्रो कामेश्वर नाथ सिंह, जो स्वयं एक भूगोलविद हैं, ने शोध के निष्कर्षों पर गहरी चिंता व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट केवल एक अध्ययन नहीं, बल्कि एक चेतावनी है. संबंधित विभागों को तुरंत सक्रिय होकर जोखिम कम करने की योजना बनानी चाहिए.

क्या कहता है शोध:

सीयूएसबी के भूगोल विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ सोमनाथ बेरा के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन के मुताबिक, वर्ष 2100 तक अत्यधिक भूस्खलन संवेदनशील क्षेत्रों का विस्तार होगा. शोध में उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीकों का उपयोग कर एक हाई-रिजॉल्यूशन लैंडस्लाइड ससेप्टिबिलिटी इंडेक्स तैयार किया गया है. सबसे खराब परिदृश्य में, संवेदनशील इलाकों में रहने वाली आबादी पर जोखिम मौजूदा समय से छह गुना तक बढ़ सकता है. यह अध्ययन जर्नल ऑफ डिजास्टर रिस्क रिडक्शन में प्रकाशित हुआ है.

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Author: ALOK KUMAR

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