Saran News : 72 लाख के गबन में मांझी के एचएम निलंबित, प्राथमिकी का आदेश

मांझी प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, टेघरा के प्रभारी प्रधानाध्यापक अमरेंद्र कुमार सिंह पर गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है. डीइओ ने प्रधानाध्यापक को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने तथा उनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश जारी किया है.

छपरा. मांझी प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, टेघरा के प्रभारी प्रधानाध्यापक अमरेंद्र कुमार सिंह पर गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है. डीइओ ने प्रधानाध्यापक को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने तथा उनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश जारी किया है. उन पर करीब 72 लाख रुपये की सरकारी राशि के गबन का आरोप है, जो उन्होंने विद्यालय भवन निर्माण, पोशाक योजना, छात्रवृत्ति योजना, शैक्षणिक परिभ्रमण और मध्याह्न भोजन योजना के मद से कथित रूप से किया है. यह मामला तब सामने आया जब बीइओ तथा बीडीओ ने डीइओ को इस संबंध में रिपोर्ट भेजी. रिपोर्ट में कहा गया कि अमरेंद्र कुमार सिंह ने योजनाओं से प्राप्त धनराशि का दुरुपयोग किया और कई मामलों में विद्यालय में कार्यों के नाम पर राशि उठाकर उसका लेखा-जोखा प्रस्तुत नहीं किया. बीइओ ने उनसे स्पष्टीकरण भी मांगा, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. जांच में पाया गया कि एचएम के साथ-साथ दो अन्य शिक्षक रंजन प्रसाद गुप्ता (विशिष्ट शिक्षक) और रेशमा (विशिष्ट शिक्षिका) भी बिना किसी शैक्षणिक कार्य के आठ महीने से वेतन ले रहे थे. जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) द्वारा की गयी जांच में यह तथ्य सामने आया कि इन शिक्षकों ने शैक्षणिक गतिविधियों से पूरी तरह दूरी बनाये रखी और फिर भी नियमित रूप से वेतन लिया, जो सरकारी कोष का दुरुपयोग है. इस संबंध में डीइओ ने आदेश दिया है कि एचएम सहित तीनों शिक्षकों द्वारा पिछले आठ महीनों में प्राप्त वेतन की गणना कर उसकी 50 प्रतिशत राशि एकमुश्त सरकार को वापस की जाये. यह राशि संबंधित शिक्षक या शिक्षिका से वसूल कर सरकारी कोष में चालान के माध्यम से जमा करने का निर्देश दिया गया है. साथ ही, इन शिक्षकों का स्थानांतरण भी अन्यत्र करने की अनुशंसा की गयी है. इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि आदेश के अनुपालन में किसी भी प्रकार की शिथिलता पायी जाती है, तो संबंधित अधिकारी स्वयं जिम्मेदार माने जायेंगे. बीइओ को सख्त निर्देश दिया गया है कि वे थाने में प्राथमिकी दर्ज कर मामले में संलिप्त सभी लोगों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई करें. यह मामला शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करता है, साथ ही यह संकेत भी देता है कि अब शिक्षा विभाग गबन जैसे मामलों में सख्ती से कार्रवाई कर रहा है. यदि दोष सिद्ध होता है तो आरोपित प्रधानाध्यापक और अन्य शिक्षकों को न केवल सेवा से बर्खास्त किया जा सकता है, बल्कि जेल भी जाना पड़ सकता है.

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