सारण : 900 साल पुराना गोवर्धन दास सरोवर का अस्तित्व, यहां सोने-चांदी के गहने पहनती थीं मछलियां और कछुए, आज भी नहीं सूखता है पानी

Saran Govardhan Das Sarovar : छपरा का 900 साल पुराना गोवर्धन दास सरोवर अपनी अद्भुत लोक-कथाओं और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। जानें इस रहस्यमयी तालाब की पूरी कहानी।

Saran Govardhan Das Sarovar : सारण जिले के छपरा-बनियापुर मुख्य मार्ग पर करिंगा के पास स्थित गोवर्धन दास सरोवर आज भी अपनी ऐतिहासिक विरासत, प्राकृतिक सुंदरता और लोकमान्यताओं के कारण लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. करीब 900 वर्ष पुराने इस सरोवर से जुड़ी कई कथाएं पीढ़ियों से सुनाई जाती रही हैं. यहां का शांत वातावरण, हरियाली और शिव मंदिर इसे धार्मिक व पर्यटन की दृष्टि से भी खास बनाते हैं.

900 वर्ष पुराना है सरोवर

छपरा-बनियापुर मुख्य मार्ग के किनारे सदर प्रखंड के करिंगा गांव के पास स्थित गोवर्धन दास सरोवर क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल माना जाता है. स्थानीय लोगों के अनुसार यह सरोवर लगभग 900 वर्ष पुराना है और अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण दूर-दूर से लोगों को आकर्षित करता है.

गोवर्धन दास से जुड़ी हैं कई लोकमान्यताएं

स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार इस सरोवर का निर्माण गोवर्धन दास नामक व्यक्ति ने कराया था, जिसके नाम पर इसे गोवर्धन दास पोखरा कहा जाने लगा. लोकमान्यताओं के अनुसार उन्हें तालाब के जीवों, विशेषकर मछलियों और कछुओं से विशेष लगाव था. यह भी कहा जाता है कि उनके बुलाने पर मछलियां और कछुए उनके पास आ जाते थे. इन दावों का स्वतंत्र ऐतिहासिक या वैज्ञानिक सत्यापन उपलब्ध नहीं है, लेकिन यह कथाएं स्थानीय लोकपरंपरा का हिस्सा हैं.

भीषण गर्मी में भी नहीं सूखता पानी

ग्रामीणों का कहना है कि भीषण गर्मी और अल्प वर्षा के दौरान भी इस सरोवर का जल पूरी तरह नहीं सूखता. स्थानीय लोग इसे इसकी विशेष प्राकृतिक विशेषता मानते हैं. हालांकि इसके जलस्तर के स्थिर रहने के वैज्ञानिक कारणों पर कोई आधिकारिक अध्ययन उपलब्ध नहीं है.

शिव मंदिर और हरियाली बढ़ाते हैं आकर्षण

सरोवर परिसर में स्थित शिव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. प्रतिदिन सुबह और शाम यहां पूजा-अर्चना के लिए लोग पहुंचते हैं. तालाब के चारों ओर हरियाली, फलदार पेड़ और फूल इसकी सुंदरता को और बढ़ाते हैं. परिवारों के लिए यह स्थान सुकून भरे समय बिताने का भी पसंदीदा स्थल बन गया है.

पर्यटक मछलियों को खिलाते हैं दाना

सरोवर पर आने वाले लोग यहां मौजूद मछलियों को दाना और अन्य खाद्य सामग्री खिलाते हैं. छुट्टियों और विशेष अवसरों पर यहां स्थानीय लोगों के साथ आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं.

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By प्रभात किरण हिमांशु

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