सारण में गंडामन मिड डे मील त्रासदी की बरसी पर छलके आंसू, 13 साल बाद भी अधूरे हैं विकास के वादे

सारण के गंडामन गांव में 2013 की मिड डे मील त्रासदी की बरसी पर 23 मासूमों को श्रद्धांजलि दी गई. 13 साल बीत जाने के बाद भी सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास का इंतजार है. परिजनों ने आज भी मुख्यमंत्री के आने की आस लगाई है.

Gandaman Mid Day Meal Tragedy Anniversary Saran : सारण जिले के मशरक प्रखंड के धर्मासती गंडामन गांव में गुरुवार को वर्ष 2013 की मिड डे मील त्रासदी की बरसी पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई. इस दौरान मृत बच्चों के परिजनों और ग्रामीणों ने पूजा-पाठ कर दिवंगत बच्चों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की तथा स्मारक पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी.

23 मासूमों को नम आंखों से किया याद

श्रद्धांजलि सभा में सबसे पहले मृत बच्चों के परिजनों ने पूजा-अर्चना की. इसके बाद बच्चों के स्मारक पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई. कार्यक्रम में प्रखंड प्रमुख रविप्रकाश सिंह मंटू, सरपंच संघ के प्रखंड अध्यक्ष अजय सिंह, शत्रुध्न सिंह समेत कई जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे.

आज भी सिहर उठते हैं गांव के लोग

16 जुलाई 2013 को गंडामन में मिड डे मील खाने से 23 बच्चों की मौत हो गई थी. इस दर्दनाक घटना ने बिहार ही नहीं, पूरे देश को झकझोर दिया था. बरसी के मौके पर ग्रामीणों ने उस भयावह दिन को याद करते हुए कहा कि इतने वर्षों बाद भी उस हादसे की याद आज भी लोगों को अंदर तक झकझोर देती है.

विकास के वादे अब भी अधूरे

ग्रामीणों का कहना है कि हादसे के बाद गांव को गोद लेने की घोषणा की गई थी, लेकिन 13 वर्ष बीत जाने के बावजूद सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं का समुचित विकास नहीं हो सका. परिजनों ने कहा कि हादसे में प्रभावित परिवारों और उपचार के बाद बचे बच्चों को आज भी मुख्यमंत्री के गांव आने का इंतजार है.

मिड डे मील पर अब भी नहीं लौटा भरोसा

परिजनों का कहना है कि इस घटना के बाद कई अभिभावकों का मिड डे मील पर भरोसा पूरी तरह नहीं लौट पाया है. आज भी कई बच्चे घर से टिफिन लेकर स्कूल जाते हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षा व्यवस्था और मिड डे मील की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है.

हादसे का गवाह बना स्कूल भवन आज भी मौजूद

जिस नवसृजित प्राथमिक विद्यालय के सामुदायिक भवन में यह दर्दनाक हादसा हुआ था, वह भवन आज भी मौजूद है. ग्रामीणों के अनुसार हादसे में दफन एक मासूम की मजार भी उपेक्षा का शिकार है और जंगली घास से ढकी हुई है. वर्तमान में विद्यालय कक्षा 8 तक संचालित है, जहां 100 से अधिक छात्र नामांकित हैं और तीन शिक्षक पदस्थापित हैं. इसके बावजूद ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था को लेकर अब भी असंतोष जता रहे हैं.


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Author: Chandrashekhar Saran

Published by: Vivek Ranjan

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