Sadar hospital chhapra: सदर अस्पताल छपरा में करीब एक वर्ष पहले ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन मशीन पहुंचने के बावजूद अब तक इंस्टॉल नहीं होने के मामले को लेकर मंगलवार की देर शाम शहर में कैंडल मार्च निकाला गया. फेस ऑफ फ्यूचर इंडिया के नेतृत्व में निकाले गये इस मार्च में बड़ी संख्या में सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साथ आम लोग शामिल हुए. मार्च के दौरान सदर अस्पताल में मशीन को तत्काल चालू कराने की मांग प्रमुखता से उठायी गयी.
कैंडल मार्च छपरा कचहरी स्टेशन से शुरू होकर नगर पालिका चौक और थाना चौक होते हुए सदर अस्पताल परिसर पहुंचकर समाप्त हुआ. प्रदर्शन में शामिल लोगों के हाथों में जलती मोमबत्तियां, तिरंगा और विभिन्न मांगों से संबंधित तख्तियां थीं.
मशीन चालू नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी
फेस ऑफ फ्यूचर इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष मंटू कुमार यादव ने कहा कि यह कैंडल मार्च केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनहित के निर्णायक संघर्ष का शंखनाद है. उन्होंने कहा कि लंबे समय से बंद पड़ी मशीन को अब और इंतजार नहीं कराया जा सकता. यह मुद्दा किसी व्यक्ति या संगठन का नहीं, बल्कि पूरे सारण की जनता के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा है.
उन्होंने कहा कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से और व्यापक किया जायेगा. आने वाले दिनों में धरना-प्रदर्शन, जनसंपर्क अभियान, सामूहिक विरोध और जरूरत पड़ने पर भूख हड़ताल जैसे शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक कदम उठाये जा सकते हैं.
उन्होंने कहा कि अभी कुछ लोग सड़कों पर उतरे हैं, लेकिन आने वाले दिनों में सारण के हर प्रखंड, पंचायत और गांव से लोग इस अभियान से जुड़ेंगे. मशीन को जनता के लिए चालू कराने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही गयी.
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग
फेस ऑफ फ्यूचर इंडिया ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से जनभावनाओं को गंभीरता से लेते हुए मशीन को तत्काल इंस्टॉल कर चालू कराने की मांग की है. संगठन का कहना है कि समय रहते कार्रवाई होने से आंदोलन को और व्यापक करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
कैंडल मार्च में भाजपा युवा मोर्चा के क्षेत्रीय प्रभारी राजीव कुमार तिवारी, प्रभारी सचिव मकेश्वर पंडित, रेड ब्लड वॉरिअर सुप्रीमो तारिक अनवर, आशुतोष कुमार, विनय कुमार, पूजा कुमारी, मनीषा कुमारी, जिया, प्रतीक, सत्येंद्र कुमार यादव, शैलेश कुमार, विक्की कुमार समेत विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों से जुड़े सैकड़ों लोग शामिल हुए.
क्यों जरूरी है ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन मशीन
ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन मशीन की मदद से पूरे रक्त को उसके अलग-अलग घटकों में विभाजित किया जाता है. यह प्रक्रिया सेंट्रीफ्यूगेशन के सिद्धांत पर आधारित होती है. मशीन में रक्त को विशेष सेंट्रीफ्यूज बैग में रखकर तेज गति से घुमाया जाता है, जिससे रक्त के अलग-अलग घटक उनके घनत्व के आधार पर अलग हो जाते हैं.
अलग किये गये रेड ब्लड सेल्स का इस्तेमाल गंभीर एनीमिया, दुर्घटना या सर्जरी के दौरान रक्त की कमी पूरी करने में किया जाता है. वहीं प्लेटलेट्स का उपयोग डेंगू, मलेरिया और कीमोथेरेपी के दौरान प्लेटलेट्स की कमी वाले मरीजों के इलाज में किया जाता है.
इसके अलावा प्लाज्मा जैसे रक्त घटक गंभीर रूप से जले मरीजों, लिवर की बीमारी और रक्त के थक्के जमने से जुड़े विकारों के उपचार में उपयोगी होते हैं.
एक रक्तदाता से कई मरीजों को मिल सकता है लाभ
ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि एक रक्तदाता के रक्त को अलग-अलग घटकों में विभाजित कर कई मरीजों की जरूरत पूरी की जा सकती है. मरीज को केवल वही रक्त घटक दिया जाता है जिसकी उसे आवश्यकता होती है. इससे अनावश्यक रक्त चढ़ाने से बचने, संभावित दुष्प्रभाव कम करने और ब्लड बैंक की कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है.
ऐसे में सदर अस्पताल में मशीन के उपलब्ध होने के बावजूद अब तक इंस्टॉल नहीं होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं. संगठन और स्थानीय लोगों ने मशीन को जल्द से जल्द चालू कराने की मांग की है.
