छपरा नगर निगम का 415 करोड़ का बजट महापौर-पार्षदों को झगड़े में अटका, विभाग को नहीं दिया गया जवाब

छपरा नगर निगम में चल रहा महापौर और पार्षदों का विवाद विकास योजनाओं पर भारी पड़ रहा है. 415 करोड़ का बजट नगर विकास विभाग की मंजूरी के इंतजार में अटका हुआ है, जिससे शहर के विकास कार्य ठप हैं.

छपरा नगर निगम की सभी प्रकार की विकास योजनाएं ठप पड़ी हुई है. किसी भी बिंदु पर नया निर्णय नहीं हो पा रहा है. नई सड़कों का निर्माण, नए ड्रेनेज का निर्माण, स्ट्रीट लाइट लगाने का मामला, हाई मास्ट लाइट लगाने का मामला समेत कई बड़ी योजनाएं पेंडिंग पड़ी हुई है. इसका सबसे बड़ा कारण है कि नगर विकास विभाग ने छपरा नगर निगम को बोर्ड की बैठक करने से संबंधित हरी झंडी अभी तक नहीं दी है. ऐसे में पार्षद से लेकर अधिकारी तक इंतजार में है कि कब वहां से हरी झंडी मिलती है कि आगे की कार्रवाई की जाए.

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इस कारण से फंसा है पेंच

बीते 22 जुलाई को महापौर लक्ष्मी नारायण गुप्ता ने बोर्ड की बैठक के दौरान 6 पार्षदों को गंभीर आरोप लगाते हुए बैठक से 60 दिनों के लिए निष्कासित कर दिया था. इस मामले को लेकर उप महापौर और लगभग 25 पार्षदों ने नगर विकास विभाग के सचिव और अन्य अधिकारियों से खुद मिलकर कार्रवाई को नगर निगम नियमावली के विरुद्ध बताया था.

नगर विकास विभाग के सचिव ने महापौर और नगर आयुक्त को एक पत्र जारी करते कई बिंदुओं पर सवाल उठाया था. सचिव ने पूछा था कि पत्र द्वारा जिन 6 पार्षदों को 60 दिनों के लिए निलंबित किया गया है, उससे स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि इस प्रकार की कार्रवाई के पूर्व बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 की धारा 52 (2) एवं (3) का पूर्णरुपेण अनुपालन किया गया है अथवा नहीं? उक्त निलंबन आदेश में अधिनियम के प्रावधानानुसार पार्षदों को पूर्व में बैठक से हटाये जाने या दूसरी बार भी चेतावनी दिये जाने एवं पार्षदों के अभ्यासिक रूप से भारी अव्यवस्था उत्पन्न करने के दृष्टिपथ, इस प्रकरण में, कार्रवाई का कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है. किसी पार्षद को निलंबन करने के पूर्व प्रश्नगत अधिनियम के अन्तर्गत विभिन्न चरणों का पूर्ण होना आवश्यक है. इस प्रकार यह कार्रवाई प्रथम दृष्टतया विधि सम्मत प्रतीत नहीं होती है.

नगर विकास विभाग के सचिव ने पूरे मामले में तीन दिनों के अंदर जवाब उपलब्ध कराने को कहा था. बताया जा रहा है कि अभी तक विभाग को जवाब नहीं गया है. इसी वजह से विभाग में भी महापौर और नगर आयुक्त को आगे की बैठक और निर्णय लेने के लिए अनुमति नहीं दी है.

2026-27 का 415 करोड़ का बजट कागजों में अटका

नगर विकास विभाग जब तक महापौर और नगर आयुक्त को आगे की बैठक के लिए अनुमति नहीं देता है तब तक 2026 -27 के लिए स्वीकृत किए गए 415 करोड़ के बजट से संबंधित योजनाओं पर कोई काम नहीं हो सकता है. इस बजट में शहर की सड़क, ड्रेनेज, पार्क, मार्केट, साफ सफाई डेढ़ सौ से अधिक अन्य योजनाएं और छोटे बड़े कार्य हैं जिनका पूरा किया जाना है.

पूरे मामले में कई बार महापौर और नगर आयुक्त से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन फोन रिसीव नहीं किया गया.

क्या बोलीं उप महापौर

नगर विकास विभाग से जब तक आदेश प्राप्त नहीं हो जाता तब तक बैठक कैसे हो सकती है. महापौर के द्वारा की गई कार्रवाई नियम के विरुद्ध थी. इसी वजह से नगर विकास विभाग ने कई बिंदुओं पर जवाब मांगा है. - रागिनी देवी, उप महापौर, नगर निगम छपरा

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By संजय भारद्वाज

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