Rakhi Market: रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक आते ही छपरा शहर के विभिन्न बाजारों में राखी की दुकानें सज गयी हैं. फुटपाथ से लेकर प्रमुख बाजारों तक रंग-बिरंगी और डिजाइनर राखियां ग्राहकों को आकर्षित कर रही हैं. थोक बाजार में भी व्यवसायियों ने त्योहार को देखते हुए राखी का नया स्टॉक मंगाया है, लेकिन पिछले तीन-चार वर्षों की तुलना में इस बार कारोबारियों में उत्साह कम दिखाई दे रहा है. स्थानीय बाजार में राखी की मांग घटने का सबसे बड़ा कारण ऑनलाइन कारोबार को माना जा रहा है.
थोक कारोबारियों का कहना है कि पहले रक्षाबंधन से कई सप्ताह पहले ही ग्रामीण क्षेत्रों के खुदरा दुकानदार छपरा के थोक बाजार में राखी खरीदने पहुंचने लगते थे. इससे सरकारी बाजार सहित अन्य थोक मंडियों में काफी चहल-पहल रहती थी. ग्रामीण इलाकों में भी स्थानीय दुकानदारों के माध्यम से राखियों की अच्छी बिक्री होती थी, लेकिन अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और बड़े सप्लायरों की सीधी आपूर्ति के कारण स्थानीय थोक कारोबार प्रभावित हो रहा है.
चार-पांच लाख की जगह अब एक से डेढ़ लाख का ऑर्डर
शहर के सरकारी बाजार में कई ऐसे थोक कारोबारी हैं, जो हर पर्व-त्योहार के सीजन में मांग के अनुसार सामान मंगाकर फुटपाथी और छोटे दुकानदारों को उपलब्ध कराते हैं. कारोबारियों के अनुसार इस बार राखी के सीजन में स्टॉक मंगाने में भी सावधानी बरती गयी है.
थोक व्यवसायी मनोज गुप्ता ने बताया कि पिछले तीन-चार वर्षों से राखी का कारोबार लगातार कम हो रहा है. ऑनलाइन कारोबार ने बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बना ली है. शहर के बड़ी संख्या में लोग अब ऑनलाइन राखियां मंगा लेते हैं. पहले थोक कारोबारी चार से पांच लाख रुपये तक की पूंजी लगाकर राखी का स्टॉक मंगाते थे, लेकिन अब एक से डेढ़ लाख रुपये लगाने में भी कारोबारियों को जोखिम महसूस हो रहा है.
फुटपाथ पर सजी दुकानें, लेकिन पहले जैसी रौनक नहीं
रक्षाबंधन को लेकर शहर के विभिन्न इलाकों में फुटपाथ पर छोटी-बड़ी राखी की दुकानें सज गयी हैं. दुकानदारों ने ग्राहकों की पसंद को देखते हुए डिजाइनर, कार्टून, बच्चों की पसंद वाली और पारंपरिक राखियां मंगायी हैं. हालांकि दुकानदारों का कहना है कि बाजार में पहले जैसी रौनक नहीं है.
कई दुकानदारों ने स्थानीय और हैंडमेड राखियों को भी बिक्री के लिए रखा है. फुटपाथ की दुकानों पर 20 रुपये से लेकर 100 रुपये तक की राखियां उपलब्ध हैं. कम कीमत वाली राखियों के साथ कुछ दुकानदार प्रीमियम डिजाइन की राखियां भी बेच रहे हैं.
ग्रामीण क्षेत्रों से खुदरा दुकानदारों की आमद घटी
स्थानीय थोक कारोबारियों के लिए सबसे बड़ी चिंता ग्रामीण क्षेत्रों से खुदरा दुकानदारों की घटती आमद है. कारोबारियों के अनुसार अब ग्रामीण क्षेत्रों के दुकानदारों को पटना और उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों के बड़े सप्लायर सीधे सामान भेज रहे हैं. इससे उन्हें छपरा की थोक मंडियों तक आने की जरूरत कम पड़ रही है.
इसके अलावा क्रेडिट पर सामान देने की व्यवस्था में भी बदलाव आया है. कारोबारियों के अनुसार पहले बड़े सप्लायर 20 से 30 प्रतिशत तक अग्रिम राशि लेकर पूरा माल भेज देते थे, लेकिन अब 50 से 60 प्रतिशत तक राशि पहले जमा करायी जा रही है. इससे पहले से कारोबार में मंदी झेल रहे छोटे और मध्यम थोक कारोबारी अधिक पूंजी लगाकर माल मंगाने से बच रहे हैं.
ऑनलाइन बाजार में डिस्काउंट और डिजाइनर राखियों की भरमार
ऑनलाइन बाजार में राखियों की अलग-अलग रेंज के साथ ग्राहकों को आकर्षक डिस्काउंट भी मिल रहा है. कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर डिजाइनर और नयी तरह की राखियां स्थानीय बाजार की तुलना में 15 से 20 प्रतिशत तक कम कीमत में उपलब्ध होने का दावा किया जा रहा है. होम डिलीवरी की सुविधा भी ग्राहकों को ऑनलाइन खरीदारी की ओर आकर्षित कर रही है.
ऑनलाइन बाजार में बच्चों के लिए कार्टून कैरेक्टर वाली राखियों से लेकर भाई-बहन के नाम वाली कस्टमाइज्ड राखियां, मोती और स्टोन वाली डिजाइनर राखियां तथा हैंडमेड विकल्प भी उपलब्ध हैं. इससे स्थानीय दुकानदारों के सामने ग्राहकों को आकर्षित करने की चुनौती बढ़ गयी है.
शॉपिंग मार्ट भी दे रहे आकर्षक ऑफर
शहर के प्रमुख शॉपिंग मार्ट में भी राखी की बिक्री शुरू हो गयी है. यहां आकर्षक पैकेजिंग और ऑफर के साथ राखियां उपलब्ध करायी जा रही हैं. कुछ मार्ट में एक हजार रुपये से अधिक की खरीदारी पर चार से पांच राखियां मुफ्त देने जैसे ऑफर भी ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं.
स्थानीय बाजार में कीमतों की बड़ी रेंज
फुटपाथ और स्थानीय दुकानों पर 20 रुपये से लेकर 100 रुपये तक की राखियां उपलब्ध हैं. वहीं डिजाइन और गुणवत्ता के अनुसार इससे महंगी राखियां भी बाजार में मौजूद हैं. कारोबारियों को उम्मीद है कि रक्षाबंधन के एक-दो दिन पहले बाजार में ग्राहकों की भीड़ बढ़ सकती है और बिक्री में कुछ सुधार हो सकता है.
