Saran News : शिक्षा विभाग के छह लिपिकों पर हुई कार्रवाई, कार्यपालक सहायकों को वापस भेजा गया बेल्ट्रॉन

Saran News : जिले में शिक्षकों के मातृत्व अवकाश, चिकित्सा अवकाश, अर्जित अवकाश, वेतन बकाया व अन्य लंबित भुगतान मामलों की अनदेखी अब संबंधित कर्मचारियों पर भारी पड़ने लगी है.

छपरा. जिले में शिक्षकों के मातृत्व अवकाश, चिकित्सा अवकाश, अर्जित अवकाश, वेतन बकाया व अन्य लंबित भुगतान मामलों की अनदेखी अब संबंधित कर्मचारियों पर भारी पड़ने लगी है. जिला शिक्षा पदाधिकारी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आधा दर्जन लिपिकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है. साथ ही दो डाटा एंट्री ऑपरेटर को कार्यमुक्त कर बेल्ट्रॉन वापस भेज दिया गया है. 10 जुलाई को समीक्षा बैठक के दौरान पाया गया कि बड़ी संख्या में लंबित मामलों की सही तरीके से सूचीबद्धता नहीं की गयी है और न ही इनसे संबंधित कोई पंजी तैयार की गयी थी. संबंधित लिपिक मामलों की स्थिति से अनभिज्ञ दिखे, जिससे उनकी कार्य के प्रति लापरवाही उजागर हो गयी. इस आधार पर जिला शिक्षा पदाधिकारी ने 13 जुलाई तक कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा है, अन्यथा विभागीय कार्रवाई तय मानी जा रही है. जिन लिपिक पर कार्रवाई की गई है उनमें आशुतोष श्रीवास्तव, लिपिक, शशिभूषण सिंह, लिपिक, अवधेश कुमार सिंह, लिपिक, आफताब आलम, लिपिक, विवेक राज, लिपिक आदि शामिल है. एक अन्य मामले में इ-शिक्षाकोष ऐप पर प्राप्त शिक्षकों की शिकायतों के निष्पादन में भी भारी अनियमितता उजागर हुई है. समीक्षा के दौरान पाया गया कि सत्येन्द्र कुमार यादव व अजीत कुमार आर्य डाटा एंट्री ऑपरेटर ने बिना वास्तविक निष्पादन किये शिकायतों को फुली कंप्लायंस दिखा दिया. जांच में पाया गया कि दोनों ने परिवाद की स्थिति से अवगत हुए बिना ही ऑनलाइन निष्पादन दिखा दिया, जो न केवल गंभीर लापरवाही है, बल्कि विभाग को गुमराह करने वाला कृत्य भी है. इस अनुशासनहीनता को देखते हुए दोनों ऑपरेटरों को 11 जुलाई 2025 से कार्यमुक्त कर दिया गया है और उन्हें बेल्ट्रॉन वापस भेजा गया है. जिले के सभी विद्यालयों को मिला विशेष निर्देश जिला शिक्षा पदाधिकारी ने जिले के सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों, कार्यालय कर्मियों और अधिकारियों को निर्देश दिया है कि शिक्षकों की लंबित शिकायतों का समाधान कैम्प मोड में शीघ्र किया जाये. उन्होंने बताया कि विभिन्न माध्यमों से प्राप्त शिकायतों की संख्या सात सौ से अधिक हो चुकी है, जो एक गंभीर चिंता का विषय है. विशेष रूप से इ-शिक्षाकोष पोर्टल, जिला पदाधिकारी के जनता दरबार व अन्य मंचों से मिल रही शिकायतों के समाधान में तेजी लाने का निर्देश दिया गया है.

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By Chandrashekhar saran

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