सोनपुर. विश्व प्रसिद्ध हरिहरक्षेत्र सोनपुर स्थित श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम नौलखा मंदिर में गुरुवार को 27वें श्रीब्रह्मोत्सव सह श्री महालक्ष्मी नारायण यज्ञ का तीसरा दिन मनाया गया. इस अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने यज्ञ मंडप की परिक्रमा की. भगवान श्रीगजेन्द्र मोक्ष भगवान बालाजी वेंकटेश का विश्व मोहिनी स्वरूप का श्रृंगार किया गया, जिसे देखने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी. इस अवसर पर हरिहरक्षेत्र श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम दिव्यदेश पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य जी महाराज ने कहा कि श्रीब्रह्मा जी ने जिस उत्सव को प्रथम बार मनाया उसी उत्सव का नाम ब्रह्मोत्सव पड़ा. उन्होंने ब्रह्मोत्सव दर्शन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जो नर-नारी इस उत्सव में रथारूढ़ भगवान के रथ का दर्शन करता है और रथ खींचता है, उसका पुनर्जन्म नहीं होता. स्वामी लक्ष्मणाचार्य ने बताया कि प्राचीन भारत में दान को सर्वोच्च स्थान प्राप्त था और यज्ञों के माध्यम से समाज में आपसी समझौता और सद्भाव स्थापित होता था.
ब्रह्मोत्सव के तीसरे दिन उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
विश्व प्रसिद्ध हरिहरक्षेत्र सोनपुर स्थित श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम नौलखा मंदिर में गुरुवार को 27वें श्रीब्रह्मोत्सव सह श्री महालक्ष्मी नारायण यज्ञ का तीसरा दिन मनाया गया.
