सदर अस्पताल में पहली बार शुरू हुआ कान के परदे का ऑपरेशन
छपरा (सारण) : सदर अस्पताल में कान के परदे का ऑपरेशन बुधवार को शुरू हो गया. इसकी शुरुआत सिविल सर्जन डॉ निर्मल कुमार तथा उपाधीक्षक डॉ शंभूनाथ सिंह ने संयुक्त रूप से किया. छपरा सदर अस्पताल बिहार का पहला सदर अस्पताल है, जहां कान के परदे का ऑपरेशन शुरू किया गया है. पहले दिन दो […]
By Prabhat Khabar Digital Desk |
June 15, 2017 5:55 AM
छपरा (सारण) : सदर अस्पताल में कान के परदे का ऑपरेशन बुधवार को शुरू हो गया. इसकी शुरुआत सिविल सर्जन डॉ निर्मल कुमार तथा उपाधीक्षक डॉ शंभूनाथ सिंह ने संयुक्त रूप से किया. छपरा सदर अस्पताल बिहार का पहला सदर अस्पताल है, जहां कान के परदे का ऑपरेशन शुरू किया गया है. पहले दिन दो मरीजों का ऑपरेशन किया गया जिसमें गड़खा थाना क्षेत्र के मुबारकपुर गांव की लाली देवी और भेल्दी थाना क्षेत्र के तरवार गांव के चंदन कुमार का नाम शामिल हैं.
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इस अवसर पर अस्पताल प्रबंधक राजेश्वर प्रसाद समेत अन्य सभी चिकित्साकर्मी मौजूद थे. राज्य के किसी भी सदर अस्पताल में कान के पर्दे का ऑपरेशन करने की कोई व्यवस्था नहीं है. सिविल सर्जन डॉ निर्मल कुमार ने कहा कि इस तरह के ऑपरेशन तथा उपचार की व्यवस्था सदर अस्पतालों में कहीं भी नहीं है. यह सुविधा केवल मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ही उपलब्ध कराया जा रहा है. उन्होंने कहा कि सदर अस्पताल में पदस्थापित इएनटी रोग के सर्जन डॉ सोनू कुमार अपने व्यक्तिगत प्रयासों से गरीब व असहाय मरीजों के लिए इस सेवा की शुरुआत किये हैं.
उपाधीक्षक डॉ शंभूनाथ सिंह ने कहा कि इस सेवा की शुरुआत हो जाने से गरीब व असहाय मरीजों को लाभ मिलेगा. उन्होंने कहा कि टिम्पेनोप्लासटी का ऑपरेशन काफी महंगा व खर्चीला भी है. उन्होंने कहा कि मरीजों की सुविधा के लिए जनहित में यह सुविधा उपलब्ध कराने का अस्पताल प्रशासन ने निर्णय लिया है.
केमिकल ट्रीटमेंट से छेद को बंद किया जा सकता है
चिकित्सकों का कहना है कि दो से तीन मिमी तक का छेद है, तो सिर्फ दवाओं की सहायता से ही केमिकल ट्रीटमेंट से छेद को बंद किया जा सकता है. इसके लिए सर्जरी की आवश्यकता नहीं है, लेकिन छेद बड़ा होने पर टेंपोरल फेसिया पर्दे को लेकर छेद को बंद कर दिया जाता है. कई बार हड्डी के गल जाने पर टाइटेनियम या टेफ्लान से बनी हड्डी को लगाया जाता है.
कई बार पर्दा और हड्डी दोनों के खराब होने पर दोनों को ठीक किया जाता है.
नर्व में परेशानी पर लगाएं मशीन
डॉ सोनू कुमार सिंह ने बताया कि 90 परसेंट लोगों में कम सुनाई देने की समस्या कान में इंफेक्शन का होना है। इसमें समय पर इलाज न मिलने पर कान के अंदर बना मवाद पर्दे में छेद कर बाहर आने लगता है. या फिर कई बार पर्दे के पीछे की हड्डी गल जाती है. ऐसा होने पर तुरंत इएनटी स्पेशलिस्ट को दिखाएं. अगर नर्व के कारण है तो इसमें हियरिंग एड यानी मशीन या कॉक्लियर इंप्लांट ही कारगर उपाय है. टेक्नीशियन मशीन से जांच कर इसका पता लगाते हैं. उन्होनें ने बताया कि प्योर टोन आडियोमेट्री जांच से सुनाई न देने के पीछे पर्दे में छेद या हड्डी में खराबी का पता करते हैं.
क्या है लक्षण
सुनने की क्षमता में कमी आने के शुरुआती लक्षण बहुत साफ नहीं होते, लेकिन यहां ध्यान देने की बात यह है कि सुनने की क्षमता में आयी कमी वक्त के साथ धीरे-धीरे और कम होती जाती है. ऐसे में जितना जल्दी हो सके, इसका इलाज करा लेना चाहिए. नीचे दिये गये लक्षण हैं तो डॉक्टर से मिलना चाहिए. सामान्य बातचीत सुनने में दिक्कत होना, खासकर अगर बैकग्राउंड में शोर हो रहा हो.
बातचीत में बार-बार लोगों से पूछना कि उन्होंने क्या कहा, फोन पर सुनने में दिक्कत होना. बाकी लोगों के मुकाबले ज्यादा तेज आवाज में टीवी या म्यूजिक सुनना. नेचरल आवाजों को न सुन पाना मसलन बारिश या पक्षियों के चहचहाने की आवाज. नवजात बच्चे का आवाज न सुन पाना आदि इसके लक्षण है.
क्या है इलाज
इन्फेक्शन की वजह से सुनने की क्षमता में कमी आयी है, तो इसे दवाओं से ठीक किया जा सकता है. अगर पर्दा डैमेज हो गया है, तो सर्जरी करनी पड़ती है. कई बार पर्दा डैमेज होने का इलाज भी दवाओं से ही हो जाता है. नर्व्स में आयी किसी कमी की वजह से सुनने की क्षमता में कमी आयी, तो जो नुकसान नर्व्स का हो गया है, उसे किसी भी तरह वापस नहीं लाया जा सकता.
ऐसे में एक ही तरीका है कि हियरिंग एड का इस्तेमाल किया जाये. हियरिंग एड फौरन राहत देता है और दिक्कत को आगे बढ़ने से भी रोकता है. ऐसी हालत में हियरिंग एड का इस्तेमाल नहीं करते, तो कानों की नर्व्स पर तनाव बढ़ता है और समस्या बढ़ती जाती है.