Samastipur News:ऐसी भी क्या जल्दी है ब्याह की… स्वर सुनाई देंगे स्कूलों में

अब सरकारी विद्यालयों में ”ऐसी भी क्या जल्दी है ब्याह की, मुझ कोमल कली को खिलने दो, खेलने कूदने के दिन हैं मेरे, जी भर कर बचपन तो जीने दो

Samastipur News:समस्तीपुर : अब सरकारी विद्यालयों में ””ऐसी भी क्या जल्दी है ब्याह की, मुझ कोमल कली को खिलने दो, खेलने कूदने के दिन हैं मेरे, जी भर कर बचपन तो जीने दो…”” कविता के स्वर सुनाई देंगे. सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को प्रत्येक शनिवार को होने वाली गतिविधियों में बाल विवाह और दहेज प्रथा की जानकारी दी जायेगी. शिक्षा विभाग के अनुसार सुरक्षित शनिवार के तहत स्कूलों में प्रत्येक शनिवार को विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं. इन्हीं गतिविधियों में बाल विवाह और दहेज प्रथा विषय को जोड़ कर जागरूकता का प्रयास किया जायेगा. शिक्षक बच्चों को बाल-विवाह और दहेज प्रथा से समाज पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव की जानकारी देंगे. डीईओ कामेश्वर प्रसाद गुप्ता ने कहा कि बाल विवाह का सबसे बड़ा प्रभाव यह होता है, कि इससे लड़कियों अपने अधिकारों से वंचित रह जाती है. जल्दी शादी होने के कारण महिलाओ को कम उम्र में अपने सारे सपनों को पीछे छोड़ कर घर के काम सीखने को मजबूर हो जाती हैं. ऐसे में लड़के और लड़कियों पर कई तरह की जिम्मेदारी डाल दी जाती हैं, जिसके लिए वो तैयार नहीं होते और इसके कारण उनका मानसिक एवं भावनात्मक विकास नहीं हो पाता है. बाल विवाह को रोकने के लिए सभी किशोरियों को जागरूक व निडर होने की जरूरत है. उन्होंने पोक्सो कानून, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, जेजे एक्ट, बाल श्रम अधिनयम की जानकारी दी जायेगी. शिक्षक सिद्धार्थ शंकर बताते है कि केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय ने भी वर्ष 2030 तक बाल विवाह के खात्मे के लक्ष्य के साथ 27 नवंबर 2024 को “बाल विवाह मुक्त भारत ” अभियान की शुरुआत की थी. आज हम बाल विवाह के खात्मे के मुहाने पर खड़े हैं. हालांकि इस दिशा में हमारे प्रयास अर्से से जारी हैं. माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में छात्राओं का एक विशेष क्लब बनाकर ‘सामूहिक अध्ययन’ को बढ़ावा दिया जाना चाहिये, ताकि वैचारिक आदान-प्रदान के माध्यम से बाल विवाह के विरुद्ध चेतना बढ़ाई जा सके. विद्यालयों में अध्यापकों द्वारा ‘लैंगिक समानता’ विषय पर कार्यक्रम एवं व्याख्यान आयोजित किये जाने चाहियें, ताकि बच्चों में महिलाओं के प्रति ‘प्रगतिशील अभिवृत्ति’ विकसित की जा सके.

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Published by: Krishan mohan pathak

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