Samastipur News:गेहूं में खरपतवार नियंत्रण व सिंचाई उत्पादन के लिए वरदान : डॉ किशोर

शस्य वैज्ञानिक डॉ कौशल किशोर ने कहा कि खरपतवार हमारी फसल के साथ साथ स्थान, पानी व पोषक तत्वों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं.

Samastipur News:पूसा : डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के शस्य वैज्ञानिक डॉ कौशल किशोर ने कहा कि खरपतवार हमारी फसल के साथ साथ स्थान, पानी व पोषक तत्वों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं. अगर इनका सही समय पर नियंत्रण नहीं किया गया तो उत्पादन में काफी कमी हो सकती है. किसानों के खेत में एक प्रत्यक्षण के दौरान वैज्ञानिक ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के परिस्थिति में रासायनिक विधि से खरपतवारों को नियंत्रित करना काफी सहज एवं आसान है. रासायनिक विधि से खरपतवार नियंत्रण के लिए कारफेंट्राजोन इथाइल 20 प्रतिशत प्लस सल्फोसल्फयूरान 25 प्रतिशत की 40 ग्राम प्रति एकड़ की मात्रा को 200 लीटर पानी में मिला कर बुवाई के 30 से 35 दिन के बाद छिड़काव करें. अथवा सल्फोसल्फ्यूरान 75 प्रतिशत प्लस मेटसल्फ्यूरान 5 प्रतिशत की 16 ग्राम प्रति एकड़ की मात्रा को 200 लीटर पानी में मिलाकर बुवाई के 25 से 30 दिन पर छिड़काव करके खरपतवारों को नियंत्रित किया जा सकता है. डा किशोर ने बताया कि यह दवाएं सकरी व चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के नियंत्रण के लिए प्रभावशाली होती है. फसलों के उचित वृद्धि एवं विकास के लिए सिंचाई का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान होता है. गेहूं में पहली सिंचाई बुवाई के 21 दिन बाद करना चाहिए. इस अवस्था को सीआरआई अवस्था कहा जाता है. इस अवस्था में गेहूं की जड़ें जमीन में फैलती हैं. ताकि पोषक तत्वों एवं जल का समुचित अवशोषण कर सकें. गेहूं का पूरा विकास व पानी एवं पोषक तत्वों का जमीन से अवशोषण इन्हीं जड़ों पर निर्भर करता है. अतः पहली सिंचाई समय से करने के बाद नाइट्रोजन का छिड़काव का करने से पौधों का अच्छा विकास व उपज में वृद्धि होती है.

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Published by: Krishan mohan pathak

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