Samastipur: दुष्कर्म के दो मामलों में FIR, POCSO समेत गंभीर धाराएं, फिर भी आरोपी गिरफ्तार नहीं

विभूतिपुर में दुष्कर्म के दो अलग-अलग मामलों में प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं. दोनों ही मामलों में POCSO एक्ट जैसी गंभीर धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगा रहे हैं.

Vibhutipur Rape Case: विभूतिपुर थाना क्षेत्र में दुष्कर्म के दो अलग-अलग मामलों में प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद अब तक नामजद आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं होने से पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं. एक मामले में नाबालिग छात्रा के कथित यौन शोषण, ब्लैकमेलिंग और अश्लील तस्वीरें वायरल करने का आरोप है, जबकि दूसरे मामले में 23 वर्षीय युवती से कथित दुष्कर्म और करीब चार माह की गर्भावस्था का दावा किया गया है.

एक मामले में POCSO और IT Act के तहत FIR

पहले मामले में पीड़िता की मां की शिकायत पर महिला थाना में कोचिंग शिक्षक समेत दो नामजद आरोपितों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट, आईटी एक्ट और बीएनएस की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गयी है.

शिकायत के अनुसार, पीड़िता करीब दो वर्ष पहले गांव के एक कोचिंग संस्थान में दसवीं कक्षा की छात्रा थी. आरोप है कि कोचिंग में कार्यरत एक शिक्षक ने शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया और कथित तौर पर उसका अश्लील वीडियो बना लिया.

वहीं दूसरे शिक्षक पर वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पीड़िता का यौन शोषण करने का आरोप लगाया गया है.

महिला थानाध्यक्ष ने प्राथमिकी दर्ज होने, पीड़िता के मेडिकल परीक्षण और बयान की प्रक्रिया पूरी होने की पुष्टि की है. पुलिस के अनुसार मामले का अनुसंधान जारी है. प्रारंभिक जांच में फेसबुक और व्हाट्सएप से जुड़े डिजिटल साक्ष्य मिलने की बात भी सामने आयी है.

दूसरे मामले में युवती के गर्भवती होने का दावा

दूसरे मामले में भी पीड़िता की मां के आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज की गयी है. इसमें योग प्रशिक्षक, उसकी पत्नी समेत अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगाये गये हैं.

आवेदन के अनुसार, योग प्रशिक्षण के दौरान युवती का आरोपी से संपर्क हुआ. इसके बाद अलग-अलग स्थानों पर उसके साथ जबरदस्ती करने का आरोप लगाया गया है. पटना के एक होटल में भी घटना होने का दावा किया गया है.

परिवार के अनुसार, 20 जुलाई 2026 को कराये गये अल्ट्रासाउंड में युवती करीब चार माह की गर्भवती पायी गयी. इसके बाद परिवार ने पुलिस से न्याय की गुहार लगायी.

FIR के बाद गिरफ्तारी नहीं, उठ रहे सवाल

दोनों मामलों में प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद खबर लिखे जाने तक नामजद आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं हुई है. इससे पुलिस की जांच और कार्रवाई की गति को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

खासकर पहले मामले में पॉक्सो जैसी गंभीर धाराएं लगाये जाने के बाद भी गिरफ्तारी नहीं होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय स्तर पर यह भी पूछा जा रहा है कि क्या पुलिस को आरोपितों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं और क्या मोबाइल, सोशल मीडिया, मेडिकल रिपोर्ट समेत अन्य साक्ष्यों की जांच पूरी हुई है.

हालांकि, केवल आरोप लगने से कोई व्यक्ति दोषी साबित नहीं होता. दोनों मामलों में आरोपों की वास्तविकता पुलिस जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी.

शिक्षण कार्य से जुड़े लोगों पर आरोप ने बढ़ाई चिंता

दोनों मामलों में शिक्षण कार्य से जुड़े लोगों के नाम सामने आने की चर्चा ने बच्चों की सुरक्षा और शिक्षकों की जवाबदेही को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है.

ऐसे मामलों में जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी करना और उपलब्ध डिजिटल एवं भौतिक साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई करना महत्वपूर्ण है.

पुलिस बोली, जांच के बाद स्पष्ट होगी वास्तविकता

इस संबंध में पूछे जाने पर थानाध्यक्ष सुनील कुमार झा ने बताया कि पुलिस जांच में जुटी है. न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट होगी.

फिलहाल दोनों मामलों में प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है और पीड़ित परिवारों की निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं.

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