Vibhutipur News: युवती को गर्भवती करने के आरोप में दर्ज प्राथमिकी के बाद विभूतिपुर पुलिस जांच में जुटी है, लेकिन मामले में समानांतर चल रही कथित पंचायती ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. सूत्रों के अनुसार, मामले को दबाने के लिए पंचायती में 10 लाख रुपये का जुर्माना तय किया गया. आरोपित शिक्षक सह योग गुरु चंदन कुमार राय ने कथित तौर पर पंचों के पास 6.5 लाख रुपये नकद जमा करा दिये हैं. वहीं बाकी 3.5 लाख रुपये के बदले अपनी कार एक पंच के नाम बंधक रखने की बात सामने आयी है.
पंचायती में तय हुआ 10 लाख रुपये का जुर्माना
बताया जा रहा है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की है. इसी दौरान स्थानीय स्तर पर पंचायती भी चल रही है. सूत्रों के मुताबिक, इसी पंचायती में मामले को दबाने के लिए आरोपी पर 10 लाख रुपये का जुर्माना तय किया गया.
आरोप है कि तय रकम में से 6.5 लाख रुपये नकद पंचों के पास जमा कराये गये हैं. शेष 3.5 लाख रुपये के एवज में आरोपी की कार एक पंच के नाम बंधक रखे जाने की बात सामने आयी है.
मेडिकल जांच और 164 के बयान के लिए नहीं पहुंची पीड़िता
मामले की अनुसंधानकर्ता सब इंस्पेक्टर आरती कुमारी ने बताया कि पीड़िता को मेडिकल जांच और अदालत में बीएनएसएस की धारा 183 के तहत बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया था. हालांकि, वह हर बार किसी न किसी कारण से आने से इनकार कर रही है.
पीड़िता के पुलिस जांच में सहयोग नहीं करने से अनुसंधान प्रभावित होने की बात सामने आ रही है. पुलिस अब पीड़िता का बयान और मेडिकल जांच कराने की प्रक्रिया पूरी करने का प्रयास कर रही है.
पंचायती में लाखों रुपये जमा होने पर उठे सवाल
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद भी आरोपी द्वारा पंचों के पास लाखों रुपये जमा कराये जाने की चर्चा से मामले को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि गंभीर आपराधिक मामले में चल रही कथित समानांतर पंचायती का कानूनी जांच पर क्या असर पड़ेगा.
मामले में शामिल पंचों की भूमिका को लेकर भी चर्चा है. हालांकि, पंचायती में रकम जमा कराने और कार बंधक रखने से संबंधित दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
पुलिस जांच और पंचायती के बीच उलझा मामला
पुलिस की जांच एक तरफ चल रही है, जबकि दूसरी ओर कथित पंचायती में समझौते की कोशिश की जा रही है. अब पुलिस के सामने पीड़िता का मेडिकल परीक्षण, अदालत में बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाने की चुनौती है.
मामले में आगे की स्थिति पीड़िता के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और पुलिस अनुसंधान के आधार पर ही स्पष्ट होगी.
