समस्तीपुर जमीन रजिस्ट्री: उजियारपुर के बेलामेघ पंचायत में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 14 भूमिहीन परिवारों को तीन-तीन डिसमिल जमीन का पर्चा दिए जाने के बाद जमीन के स्वामित्व को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. स्थानीय अजीत कुमार गिरि ने पर्चा वितरण पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि जिस खेसरा संख्या 1928 की जमीन पर पर्चा दिया गया है, वह पहले ही रजिस्ट्री हो चुकी है और वहां करीब 30 वर्षों से मकान बना हुआ है. हालांकि, अंचलाधिकारी ने इन दावों को गलत बताते हुए जमीन को बिहार सरकार की बताया है.
1946 की रजिस्ट्री का दिया हवाला
अजीत कुमार गिरि के अनुसार, बेलामेघ गांव स्थित खेसरा संख्या 1928 की जमीन वर्ष 1946 में स्टेट उमाशंकर प्रसाद ने उनके स्व. कमल गिरि के नाम रजिस्ट्री की थी. उनका दावा है कि उक्त जमीन पर करीब तीन दशक से मकान भी बना हुआ है. इसके बावजूद बिना कोई नोटिस दिए उसी जमीन का पर्चा 14 भूमिहीन परिवारों के बीच वितरित कर दिया गया.
पर्चाधारियों के पास पहले से जमीन होने का दावा
अजीत गिरि ने पर्चा पाने वाले कुछ लोगों के संबंध में भी सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि मनोज कुमार दास, कमलू दास और जितेंद्र दास समेत कुछ लाभुकों के पास पहले से जमीन और पक्का मकान मौजूद है. ऐसे में उन्हें भूमिहीन मानकर जमीन का पर्चा दिए जाने की भी जांच होनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि अंचलाधिकारी की ओर से जारी पर्चे के खिलाफ वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे और पूरे मामले को चुनौती देंगे.
सीओ बोले- सरकारी जमीन की रजिस्ट्री अवैध
वहीं, इस मामले में अंचलाधिकारी अभिषेक आनंद ने अजीत कुमार गिरि के आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है. उन्होंने कहा कि खेसरा संख्या 1928 की जमीन गैरमजरुआ खास है और बिहार सरकार के अधीन है. सीओ के अनुसार, इस जमीन की निजी रजिस्ट्री वैध नहीं है.
अंचलाधिकारी के इस बयान के बाद जमीन के स्वामित्व को लेकर दोनों पक्षों के दावे आमने-सामने आ गए हैं. अब मामले में न्यायालय में चुनौती दिए जाने के बाद जमीन के दस्तावेज और स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है.
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