Samastipur News:आंधी पानी से आम व लीची को क्षति, कई जगह गिरे पेड़, कच्चा मकान धराशायी

जिले में सोमवार की रात आयी आंधी पानी से मौसम सुहाना हो गया. हालांकि आंधी में कई जगहों पर पेड़ गिरे हैं, वहीं कच्चे घरों को भी क्षति पहुंची है.

Samastipur News:समस्तीपुर : जिले में सोमवार की रात आयी आंधी पानी से मौसम सुहाना हो गया. हालांकि आंधी में कई जगहों पर पेड़ गिरे हैं, वहीं कच्चे घरों को भी क्षति पहुंची है. जिन क्षेत्रों में बहुत तेज आंधी थी, वहां आम व लीची की फसलों को नुकसान हुआ है. कई क्षेत्रों में रात में झमाझम बारिश हुई. शाम तक लोग गर्मी से परेशान थे. वहीं देर रात शुरू हुई बारिश और आंधी ने मौसम में बदलाव ला दिया है. बारिश के कारण सब्जी, दलहन सहित कई फसलों को लाभ पहुंचा है. रबी फसल की कटाई के बाद खाली पड़े खेतों में नमी आ जाने से किसान को खेत की जुताई में सहुलियत होगी. माेरवा प्रखंड के चकसिकंदर और चकपहाड़ समेत कई पंचायतों में साेमवार की रात्रि आयी तेज आंधी पानी की वजह से व्यापक नुकसान हुआ है.चक सिकंदर पंचायत में सर्वाधिक नुकसान हुआ बताया जाता है. दर्जनों घरों के गिरने एवं सैकड़ों पैरों के धराशायी होने के कारण आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. मक्का ,सब्जी आदि फसलों को नुकसान पहुंचा है वहीं आम और लीची के फल पूरी तरह झड़ गये. दर्जनों जगहों पर बिजली के तार टूट कर गिर गए जिसके कारण विद्युत की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गयी.

सोमवार की देर रात जिले में आयी आंधी पानी

पेडों के गिरने से कई घरों को भारी नुकसान पहुंचा है, वहीं कई जगहों पर आवागमन बाधित हुआ है. मुखिया ब्रजेश प्रसाद राय,पिन्टू गिरी,समाज सेवी संतोष कुमार यादव आदि के द्वारा प्रशासन की सूचना देते हुए अविलंब मुआवजा की मांग की गई है. बताया जाता है कि आधी रात के बाद लोगों के घर पर तेज आंधी के कारण अचानक पेडों का गिरना शुरू हो गया, जिसके कारण लोगों में अफरातफरी मच गयी. कई लोगों ने भागकर अपनी जान बचायी. इसी तरह कई मवेशियों को भी सुरक्षित ठिकानों पर लगाया गया. हवा की रफ्तार इतना तेज था कि बरगद और पीपल के कई बड़े-बड़े पेड़ धराशाई हो गये. लोगों का कहना है की कितनी बड़ी त्रासदी पहले देखने को कभी नहीं मिली क्योंकि जिस हिसाब से हवा का रफ्तार था, उससे कुछ भी बचा पाना मुश्किल हो रहा था. काफी देर तक लोगों की सांसे अटकी रही. दर्जनों कच्चा मकान गिर गये जिससे कि लोगों को अब खुले आसमान के नीचे रात गुजारना मजबूरी हो गया है।

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Author: PREM KUMAR

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