Samastipur News: वीमेंस कॉलेज के अर्थशास्त्र विभाग की ओर से विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर "विकसित भारत 2047 के संदर्भ में भारत की युवा जनसंख्या: अवसर, चुनौतियां एवं संभावनाएं" विषय पर विभागीय परिचर्चा आयोजित की गई. कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. राजेश कुमार रंजन ने की, जबकि स्वागत एवं संचालन अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. विजय कुमार गुप्ता ने किया.
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार पर जोर
अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रधानाचार्य प्रो. राजेश कुमार रंजन ने कहा कि भारत की विशाल युवा आबादी देश की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है, यदि उसे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, आधुनिक कौशल और पर्याप्त रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं. उन्होंने कहा कि जनसंख्या को केवल समस्या के रूप में नहीं, बल्कि उसके गुणात्मक विकास के दृष्टिकोण से देखना चाहिए.
मानव पूंजी में बदलने पर बल
विषय प्रवेश कराते हुए डॉ. विजय कुमार गुप्ता ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे युवा देश है और उसके पास जनसांख्यिकीय लाभांश का बड़ा अवसर है. उन्होंने कहा कि यदि युवाओं को कौशल और रोजगार से नहीं जोड़ा गया तो यही अवसर भविष्य में चुनौती बन सकता है. विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए जनसंख्या को उत्पादक मानव पूंजी में बदलना सबसे महत्वपूर्ण है.
तकनीकी कौशल और महिला शिक्षा पर चर्चा
समाजशास्त्री डॉ. रंजन कुमार ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और बदलती तकनीक के दौर में युवाओं के लिए केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है. उन्हें डिजिटल साक्षरता और नवाचार की क्षमता भी विकसित करनी होगी.
वहीं इतिहास विभाग के डॉ. सुरेश साह ने सीमित संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और महिला शिक्षा को जनसंख्या स्थिरीकरण का महत्वपूर्ण आधार बताया.
छात्राओं ने पोस्टर और भाषण से दिया संदेश
परिचर्चा में बुशरा परवीन, दिव्या भारती, साक्षी और खुशी सहित अन्य छात्राओं ने भाषण और पोस्टर प्रस्तुति के माध्यम से छोटे परिवार, महिला शिक्षा, परिवार नियोजन और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर जागरूकता का संदेश दिया.
कार्यक्रम में डॉ. मधुलिका मिश्रा, डॉ. फरहत जबीं सहित महाविद्यालय के सभी शिक्षक उपस्थित रहे. वक्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि जनसंख्या बोझ या वरदान नहीं, बल्कि उसके विकास और उपयोग पर भविष्य निर्भर करता है.
