Samastipur News: समस्तीपुर जिले के मोरवा प्रखंड में आंगनबाड़ी केंद्रों पर टेक होम राशन (THR) वितरण को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. आरोप है कि पिछले दो महीने से पोषाहार की राशि केंद्रों को नहीं मिली, इसके बावजूद फेस रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) के माध्यम से राशन वितरण की ऑनलाइन एंट्री कर दी गई. कई लाभुकों के मोबाइल पर राशन प्राप्त होने का मैसेज भी पहुंच गया, जबकि उनका कहना है कि उन्हें राशन नहीं मिला.
दो महीने से नहीं मिली पोषाहार की राशि
जानकारी के अनुसार जून और जुलाई महीने की पोषाहार राशि अब तक आंगनबाड़ी सेविकाओं के खाते में नहीं पहुंची है. इसके बावजूद अधिकारियों के निर्देश पर सेविकाओं से एफआरएस के माध्यम से टेक होम राशन वितरण की ऑनलाइन एंट्री कराई जा रही है. इससे सेविकाओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है.
लाभुकों के मोबाइल पर पहुंचा राशन मिलने का मैसेज
टेक होम राशन की ऑनलाइन एंट्री के बाद कई लाभुकों के मोबाइल पर राशन प्राप्त होने का संदेश पहुंचा. हालांकि कई लाभुकों ने दावा किया कि उनका फोटो तो लिया गया, लेकिन उन्हें राशन नहीं मिला. इसे लेकर पूरे मामले में गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है.
219 केंद्रों में 92 फीसदी एंट्री का दावा
प्रखंड के 219 आंगनबाड़ी केंद्रों को आठ सेक्टरों में बांटा गया है. 23 जून की रिपोर्ट के अनुसार करीब 92 प्रतिशत लाभुकों की THR एंट्री की गई. आंकड़ों के मुताबिक सेक्टर-1 में 1159, सेक्टर-2 में 1753, सेक्टर-3 में 984, सेक्टर-4 में 1622, सेक्टर-5 में 1286, सेक्टर-6 में 1199, सेक्टर-7 में 1112 और सेक्टर-8 में 1506 लाभुकों की ऑनलाइन एंट्री दर्ज की गई.
सेविकाएं बढ़ी मुश्किल में, ऑडिट में उठ सकते हैं सवाल
सेविकाओं का कहना है कि बिना राशि प्राप्त किए ऑनलाइन एंट्री कराना भविष्य में उनके लिए परेशानी का कारण बन सकता है. उनका कहना है कि ऑडिट के दौरान खरीद से संबंधित वाउचर प्रस्तुत करना संभव नहीं होगा, जबकि ऑनलाइन वितरण का रिकॉर्ड मौजूद रहेगा. कुछ सेविकाओं ने बिना राशि मिले एंट्री करने से इनकार भी किया है.
विभागीय प्रक्रिया पर उठे सवाल
विभागीय नियमों के अनुसार राशि उपलब्ध होने के बाद निर्धारित तिथि पर एफआरएस के माध्यम से टेक होम राशन वितरण किया जाता है. लाभुक का आधार आधारित फेस वेरिफिकेशन होने के बाद ही ऑनलाइन एंट्री पूरी होती है. ऐसे में राशि जारी हुए बिना वितरण की ऑनलाइन एंट्री और लाभुकों को भेजे गए संदेश पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं. मामले में पूछे जाने पर संबंधित अधिकारी और कर्मियों ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया.
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