Samastipur News:खेल सुविधाओं की होगी एप से माॅनिटरिंग

सभी स्कूलों में उपलब्ध खेल सुविधाओं की पूरी जानकारी अब एक एप से मिल सकेगी. इस एप पर निजी व सरकारी स्कूलों के जिले से राज्य स्तर तक के खिलाड़ियों का भी पूरा विवरण होगा.

Samastipur News: समस्तीपुर : सभी स्कूलों में उपलब्ध खेल सुविधाओं की पूरी जानकारी अब एक एप से मिल सकेगी. इस एप पर निजी व सरकारी स्कूलों के जिले से राज्य स्तर तक के खिलाड़ियों का भी पूरा विवरण होगा. सभी तरह की उपलब्ध खेल संरचनाओं की एक जगह जियो टैगिंग की जायेगी. जियो टैगिंग के लिए चार विभागों की मदद से यह मोबाइल एप तैयार किया गया है. खेल विभाग के संयुक्त सचिव ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को इसे लेकर पत्र लिखा है. इसके आलोक में समस्तीपुर समेत सभी जिलों के डीईओ से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है. खेल विभाग के संयुक्त सचिव निरंजन कुमार ने लिखा है कि जियो टैगिंग किये जाने को लेकर उद्योग व आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग और भू सूचना विज्ञान संस्थान के समन्वय से एक मोबाइल एप विकसित किया गया है. इसके माध्यम से खेल के बुनियादी ढांचे, सुविधाएं, खिलाड़ियों की संख्या समेत अन्य सभी जानकारियां एकत्रित की जा रही हैं. इस पहल के बाद सभी तरह के स्कूलों में बच्चे कौन-कौन से खेलों से जुड़े हैं, इसके बारे में जाना जा सकेगा. जियो टैगिंग के बाद खेल के नाम पर स्कूलों में चल रही गड़बड़ियों की भी कलई खुलेगी. एप के लिए सभी निजी और सरकारी स्कूलों को अपने यहां के खेल मैदान का ब्योरा देना है. इसमें स्कूल के साथ ही खेल संस्थानों को भी इन सभी चीजों का रिकॉर्ड देना है. स्कूल में जो खेल सुविधाएं हैं, उसमें किसकी मदद ली गई है, इसका भी रिकार्ड एप पर रहेगा. अबतक किन-किन खेलों को बढ़ावा किन शैक्षणिक संस्थान में दिया गया है, इसकी भी जानकारी एप के माध्यम से मिल सकेगी. अभी ऐसे भी स्कूल आउटडोर खेलों के आयोजन की रिपोर्ट दे देते हैं, जिनके पास खेल का मैदान ही नहीं है. अब ऐसे फर्जीवाड़े पर लगाम लग सकेगी. इसके विपरीत सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए हर साल स्कूलों में तरंग प्रतियोगिता का आयोजन होता है. इसके पीछे सरकार की मंशा शिक्षा के साथ -साथ बच्चों को खेल के क्षेत्र में भी आगे बढ़ाने की है. इसके लिए शिक्षा विभाग लगातार कवायद में जुटा हुआ है. लेकिन इसके उलट करीब 20 फीसदी से ज्यादा सरकारी स्कूलों के पास खेल मैदान नहीं है. यहां पढ़ रहे बच्चों को स्कूल के आंगन में ही खेल की गतिविधि को चालू रखना पड़ता है. ऐसे में प्रतियोगिता की तैयारी कहां और किसके मार्गदर्शन में करें, इसको लेकर बच्चों में संशय की स्थिति है. हालांकि शहरी समेत ग्रामीण इलाकों के बच्चों में प्रतिभा की कमी नहीं है. बावजूद इसके उनकी प्रतिभा निखरकर सामने नहीं आ पाती है. ऐसे में बच्चों की जीत और उन्हें मिलने वाले मेडल के बीच खेल का मैदान बड़ी बाधा है.

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