समस्तीपुर: मथुरापुर घाट के जाम में फंसने से सर्पदंश का शिकार युवक की रास्ते में मौत

समस्तीपुर के वारिसनगर में सर्पदंश का शिकार एक युवक की इलाज के लिए अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई. परिजनों ने मथुरापुर घाट पर लगे लंबे जाम को मौत की बड़ी वजह बताया है. घटना के बाद क्षेत्र में यातायात और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. पढ़ें पूरी खबर...

समस्तीपुर के वारिसनगर से प्रतिनिधि की रिपोर्ट

Samastipur News: वारिसनगर प्रखंड क्षेत्र के लखनपट्टी पंचायत अंतर्गत वार्ड संख्या-8 निवासी रामबाबू शर्मा की सर्पदंश के बाद इलाज के लिए समस्तीपुर ले जाने के दौरान रास्ते में मौत हो गई. परिजनों का आरोप है कि मथुरापुर घाट पर लगे लंबे जाम के कारण समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने से उनकी जान चली गई.

सर्पदंश के बाद बिगड़ी हालत

मृतक की पहचान नेती शर्मा के 45 वर्षीय पुत्र रामबाबू शर्मा के रूप में हुई है. परिजनों के अनुसार शनिवार को वह अपने घर पर थे, तभी उन्हें एक विषैले सांप ने डस लिया. घटना के बाद परिजन उन्हें तत्काल स्थानीय पीएचसी लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए सदर अस्पताल समस्तीपुर रेफर कर दिया.

मथुरापुर घाट के जाम में फंसा वाहन

परिजनों का कहना है कि मरीज को लेकर जब वे समस्तीपुर जा रहे थे, तब मथुरापुर घाट के पास अधूरे निर्माण कार्य के कारण लंबा जाम लगा हुआ था. वाहन काफी देर तक जाम में फंसा रहा, जिससे अस्पताल पहुंचने में देरी हो गई. इसी दौरान रामबाबू की हालत लगातार बिगड़ती गई और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उन्होंने रास्ते में दम तोड़ दिया.

परिवार में मचा कोहराम

घटना की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया. मृतक अपने पीछे पत्नी, एक पुत्र और एक अविवाहित पुत्री छोड़ गए हैं. गांव में भी शोक का माहौल है और लोगों ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है.

सूचना मिलने पर स्थानीय थाना के एसआई अमर कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे. पुलिस ने पंचनामा तैयार कर शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया.

ग्रामीणों ने उठाए सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि मथुरापुर घाट पर जाम लगना आम समस्या बन चुकी है. उन्होंने प्रशासन से यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने तथा आपातकालीन मरीजों के लिए विशेष व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर अस्पताल पहुंचने का रास्ता मिलता, तो संभवतः रामबाबू की जान बचाई जा सकती थी.

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लेखक के बारे में

Published by: Sarfaraz Ahmad

सरफराज अहमद IIMC से प्रशिक्षित पत्रकार हैं. राजनीति, समाज और हाइपरलोकल मुद्दों पर लिखते हैं. क्रिकेट और सिनेमा में गहरी रुचि रखते हैं. बीते तीन वर्षों से मीडिया क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ कार्यरत हैं।

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