Shashinath Jha Murder Case: समस्तीपुर के चर्चित पूर्व मुखिया शशिनाथ झा हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पटना हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत हत्या और आपराधिक षड्यंत्र के मामले में दोषी ठहराये गये अभियुक्तों को जमानत और सजा के निलंबन का लाभ दिया गया था. न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने सभी निजी प्रत्यर्थियों को दो सप्ताह के भीतर विचारण न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है.
पटना हाईकोर्ट के जमानत आदेश को किया रद्द
सुप्रीम कोर्ट ने अपीलार्थी माधुरी देवी और बिहार सरकार की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट के 11 दिसंबर 2024 के आदेश को निरस्त कर दिया.
निचली अदालत ने अर्जुन दास उर्फ कारिया, निलेंद्र गिरि, हिमांशु राय, सुनील कुमार और सुमित कुमार उर्फ फुचुकिया को हत्या और आपराधिक षड्यंत्र का दोषी ठहराया था. सभी को आजीवन कारावास के साथ 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनायी गयी थी. सुनील कुमार को शस्त्र अधिनियम की धारा 27(3) के तहत भी अलग से आजीवन कारावास की सजा दी गयी थी.
इसके बाद पटना हाईकोर्ट ने आपराधिक अपील लंबित रहने के दौरान 11 दिसंबर 2024 को दोषियों की सजा स्थगित कर उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था.
एफआईआर में देरी को बनाया गया था आधार
पटना हाईकोर्ट ने जमानत देते समय प्राथमिकी दर्ज कराने में 48 घंटे की देरी को प्रमुख आधार माना था. हाईकोर्ट ने यह भी उल्लेख किया था कि शिकायतकर्ता पर्दानशीं महिला नहीं, बल्कि ग्राम पंचायत की तत्कालीन मुखिया थीं.
इसके अलावा पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक के इस कथन को भी आधार बनाया गया था कि यह उनका पहला मामला था और वे फोरेंसिक विज्ञान में बहुत दक्ष नहीं थे.
सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को माना तर्कसंगत
अपीलार्थी माधुरी देवी की ओर से अधिवक्ता राजीव कुमार झा और डीके सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दलील दी कि मृतक की नृशंस हत्या की गयी थी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज गंभीर चोटों से इसकी पुष्टि होती है.
दलील दी गयी कि हाईकोर्ट ने विचारण न्यायालय के विस्तृत और तर्कसंगत निष्कर्षों को पर्याप्त आधार के बिना दरकिनार कर दिया. यह भी बताया गया कि अभियुक्तों ने अब तक तीन वर्ष की वास्तविक सजा भी पूरी नहीं की थी और कुछ अभियुक्तों का गंभीर आपराधिक इतिहास भी रहा है.
सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों में बल पाया. पीठ ने कहा कि केवल एफआईआर दर्ज कराने में देरी या शिकायतकर्ता के निवर्तमान मुखिया होने जैसे तथ्यों के आधार पर विचारण न्यायालय के विस्तृत और तर्कसंगत फैसले पर संदेह नहीं किया जा सकता.
पीठ ने यह भी माना कि गवाहों के बयान, अभियुक्तों के आपसी संबंध और अपराध में इस्तेमाल सामग्री की बरामदगी को लेकर निचली अदालत का विश्लेषण दूषित या विकृत नहीं था.
दो सप्ताह में सरेंडर करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतिम आदेश में सभी निजी प्रत्यर्थियों को आज से दो सप्ताह के भीतर विचारण न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया. सरेंडर के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में लिया जाएगा.
हालांकि, दोषियों को अपनी मूल अपील की जल्द सुनवाई और निस्तारण के लिए हाईकोर्ट के समक्ष आवेदन देने की स्वतंत्रता दी गयी है.
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत और सजा स्थगन से संबंधित उसकी टिप्पणियां मुख्य अपील की मेरिट पर सुनवाई के दौरान प्रभावी नहीं होंगी.
इसके अलावा समस्तीपुर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अशोक मिश्रा के माध्यम से एक अन्य प्रतिवादी को नोटिस तामील कराने और मामले को 17 सितंबर 2026 को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया है.
क्या है मामला
पंचायत में विवाद सुलझाने के दौरान हुई थी हत्या
मुसरीघरारी थाना क्षेत्र के बखरी बुजुर्ग गांव में 6 अगस्त 2021 को पूर्व मुखिया 58 वर्षीय शशिनाथ झा की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी.
बताया गया कि घटना के समय शशिनाथ झा वार्ड संख्या 11 में एक विवाद को सुलझाने के लिए पंचायत कर रहे थे. पंचायत समाप्त होने के बाद जब वह चारपहिया वाहन में सवार हुए, तभी पहले से घात लगाये दो बाइक पर सवार करीब आधा दर्जन हथियारबंद अपराधियों ने उन पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी. गोली लगने से उनकी मौके पर ही मौत हो गयी.
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