Crop management: वर्तमान मौसम को देखते हुए किसानों को फसलों की देखभाल पर विशेष ध्यान देना चाहिए. कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे अरहर की बोआई का काम जल्द से जल्द पूरा कर लें. इसके लिए शरद पूसा 9 एवं राजेंद्र अरहर-1 सबसे उपयुक्त किस्में हैं. खेती हमेशा ऊंची जमीन पर करनी चाहिए तथा प्रति हेक्टेयर 45 से 50 किलोग्राम बीज का उपयोग करते हुए निश्चित दूरी पर बोआई करें.
गन्ने की फसल में जलजमाव और लाल सड़न से बचाव
गन्ने की फसल को जलजमाव और खतरनाक लाल सड़न रोग से बचाने के लिए विशेष प्रबंध करने की जरूरत है. निचली भूमि में पानी भरने से कीटों का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए खेत से तुरंत पानी निकालें. यदि लाल सड़न के लक्षण दिखें, तो पौधों को उखाड़कर कार्बेन्डाजिम या थियोफेनेट मिथाइल का घोल बनाकर ड्रेचिंग करें.
धान की फसल में खैरा रोग और गंधी बग की निगरानी
धान की फसल में खैरा रोग और गंधी बग पर कड़ी नजर रखने की आवश्यकता है. खैरा रोग का लक्षण दिखने पर जिंक सल्फेट और चूने के घोल का छिड़काव करें. वहीं, अगेती धान में दाना भरते समय गंधी बग का खतरा बढ़ने पर फोलिडोल चूर्ण का सुबह या शाम के समय भुरकाव करें.
पशुओं के स्वास्थ्य सुरक्षा और व्यावहारिक उपाय
फसलों के साथ-साथ दुधारू पशुओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए भी कृषि विशेषज्ञों ने व्यावहारिक उपाय सुझाए हैं. मौसम में हो रहे बदलाव के कारण पशुओं में विभिन्न प्रकार की बीमारियां फैलने का खतरा रहता है, जिससे बचाव के लिए समय पर टीकाकरण और उचित खानपान का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है.
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