Waste To Best: अगर मन में कुछ करने का जज्बा हो तो संसाधनों की कमी कभी आड़े नहीं आती. इस बात को समस्तीपुर के उजियारपुर स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय चैता साउथ के छात्र-छात्राओं ने सच साबित कर दिखाया है. विद्यालय की प्रधानाध्यापिका उर्मिला कुमारी और बच्चों ने वेस्ट प्लास्टिक की बोतलों से ऐसा वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार किया है, जिसकी चर्चा पूरे जिले में हो रही है.
40 फीट लंबी प्लास्टिक पाइपलाइन से बचा रहे बारिश का पानी
सरकारी स्कूल में भवन की छत से बारिश का पानी नीचे उतारने के लिए पीवीसी पाइपों की कमी थी. इस समस्या से निपटने के लिए बच्चों ने कबाड़ से कोल्ड ड्रिंक की खाली बोतलें जमा कीं.
- देसी जुगाड़: बोतलों के निचले हिस्से को काटकर उन्हें आपस में जोड़ा गया और 40 फीट से अधिक लंबी पाइपलाइन बनाई गई.
- जलतारा सोक पिट: छत से उतरने वाले पानी के लिए 100 फीट क्षमता का 5 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया, जिसमें ईंट-गिट्टी डालकर 'जलतारा' फिल्टर सोक पिट बनाया गया.
- भूजल स्तर में सुधार: इस सिस्टम से लाखों लीटर बारिश का पानी जमीन के अंदर रीचार्ज हो रहा है, जिससे आसपास का जलस्तर सुधर रहा है.
'मिशन ग्रीन' और 'जल जीवन हरियाली' से मिली प्रेरणा
'जल जीवन हरियाली' अभियान से प्रेरित होकर शुरू की गई यह पहल साबित करती है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़े बजट की नहीं, बल्कि मजबूत इरादों की जरूरत होती है.
शिक्षा विभाग ने की तारीफ
समस्तीपुर के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कामेश्वर प्रसाद गुप्ता ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह नवाचार अनुकरणीय है. विभाग जिले के अन्य स्कूलों को भी इस Waste To Best मॉडल को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा.
ये भी पढ़ें: मुसरीघरारी नगर पंचायत ने विकास कार्यों में रचा इतिहास, पीएम स्वनिधि में लक्ष्य से अधिक उपलब्धि
