समस्तीपुर: सरायरंजन प्रखंड के मुसरिघरारी से महज चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित गंगापुर चौक के समीप वार्ड संख्या 2 में विषहर माता स्थान के सौंदर्यीकरण और विकास की मांग जोर पकड़ने लगी है. सावन मास में नागपंचमी से पूर्णिमा तक यहां विशेष पूजा-अर्चना के साथ मेला लगता है. इस दौरान गंगापुर सहित आसपास के गांवों और दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु विषहर माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं.
छह-सात दशक पुराना बताया जाता है धार्मिक स्थल
स्थानीय लोगों के अनुसार, विषहर माता स्थान करीब छह-सात दशक पुराना है और क्षेत्र में आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है. इस स्थान से जुड़ी मान्यता के अनुसार करीब 60-70 वर्ष पूर्व यहां एक बरगद का पेड़ गिर गया था.
बताया जाता है कि पेड़ की सभी डालियां काट दिये जाने के बावजूद सावन मास में नागपंचमी के दिन वह पेड़ अपने आप खड़ा हो गया था. इसके बाद से लोगों की इस स्थान के प्रति आस्था और बढ़ती चली गयी.
संत राम आशीष दास और लक्ष्मी देवी ने की थी स्थापना
स्थानीय लोगों के अनुसार, विषहर स्थान की स्थापना गंगापुर वार्ड संख्या 2 निवासी स्व. संत राम आशीष दास और उनकी पत्नी स्व. लक्ष्मी देवी ने की थी.
धार्मिक स्थल को विकसित करने में वार्ड संख्या 2 के स्व. डॉ. बलदेव यादव, स्व. गोपी साह तथा वार्ड संख्या 1 के स्व. बालचंद राय और स्व. लूटन राय का भी महत्वपूर्ण योगदान बताया जाता है.
श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं बढ़ाने की मांग
गंगापुर वार्ड 2 निवासी एवं जिला साक्षरता समिति, समस्तीपुर के पूर्व कार्यकारिणी समिति सदस्य-सह-प्रखंड साक्षरता समिति, सरायरंजन के समन्वयक राम प्रवेश दास ज्योति ने क्षेत्र के सांसद नित्यानंद राय और विधायक-सह-उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी से विषहर माता स्थान के विकास और सौंदर्यीकरण की मांग की है.
उन्होंने दोनों जनप्रतिनिधियों से अपने-अपने विकास निधि कोष से विषहर माता स्थान पर सौंदर्यीकरण का कार्य कराने के साथ श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने और धार्मिक स्थल के समुचित विकास का आग्रह किया है.
