Samastipur: बिहार को मसाला हब बनाने की तैयारी, पूसा में जुटे किसान और निर्यातक

डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा में आयोजित क्रेता-विक्रेता सम्मेलन का लक्ष्य बिहार से मसाला निर्यात को बढ़ावा देना है. कुलपति ने कहा कि राज्य में हल्दी, अदरक जैसे मसालों की अपार संभावना है और इसे एशिया का 'मसाला हब' बनाया जा सकता है.

Samastipur News: बिहार के मसालों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की पहल के तहत डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (आरपीसीएयू), पूसा और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के स्पाइसेस बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को विद्यापति सभागार, आरपीसीएयू, पूसा में मसालों पर क्रेता-विक्रेता सम्मेलन का आयोजन किया गया.

सम्मेलन का उद्देश्य बिहार से मसाला निर्यात को बढ़ावा देना और किसानों, एफपीओ, किसान समूहों, मसाला उद्योग से जुड़े हितधारकों तथा देशभर के निर्यातकों के बीच सीधा संवाद स्थापित कर मसाला मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना था.

बिहार बन सकता है एशिया का मसाला हब : कुलपति

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कुलपति डॉ. पुण्यव्रत सुविमलेंदु पाण्डेय और विशिष्ट अतिथि के रूप में स्पाइसेस बोर्ड के निदेशक, विपणन, बशिष्ठ नारायण झा उपस्थित रहे. सम्मेलन का आयोजन संदीप कुमार चौरसिया, क्षेत्रीय कार्यालय, स्पाइसेस बोर्ड, कोलकाता एवं डॉ. ए. के. मिश्रा, प्रधान अन्वेषक, अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (मसाला), आरपीसीएयू द्वारा किया गया.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति डॉ. पी. एस. पाण्डेय ने कहा कि मसाला क्षेत्र में बिहार का समय आ गया है. उन्होंने कहा कि बिहार अब सिर्फ अनाज का कटोरा नहीं है, बल्कि भारत ही नहीं, पूरी दुनिया और विशेष रूप से एशिया का मसाला हब बन सकता है.

उन्होंने कहा कि बिहार की कृषि-जलवायु परिस्थितियां हल्दी, अदरक, धनिया, मेथी और अन्य उच्च मूल्य वाले मसालों के लिए उपयुक्त हैं. बिहार में चुनौती उत्पादन की नहीं, बल्कि लिंकेज, गुणवत्ता, मार्केटिंग, निर्यात और मूल्य संवर्धन की है.

कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय मसालों की विभिन्न उन्नत किस्मों, कटाई उपरांत तकनीकों और बाजार लिंकेज मॉडल विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है. क्रेता-विक्रेता सम्मेलन के माध्यम से किसानों को कृषि-उद्यमी बनाने का प्रयास किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय और स्पाइसेस बोर्ड किसानों को सीधे निर्यातकों से जोड़ने का प्रयास करेगा. इस तरह के कार्यक्रम सच्चे अर्थों में लैब से लैंड से मार्केट मॉडल हैं. उन्होंने स्पाइसेस बोर्ड से बिहार में उत्पादित मसालों के निर्यात में मदद करने का अनुरोध किया.

कुलपति ने विश्वविद्यालय में क्वालिटी टेस्टिंग लैब की स्थापना का भी अनुरोध किया, ताकि किसानों को निर्यात में सुविधा मिल सके. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय एफपीओ को मार्केटिंग, निर्यात और गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री के लिए तकनीकी जानकारी के साथ सहयोग करेगा.

बिहार में मसाला निर्यात की अप्रयुक्त क्षमता : स्पाइसेस बोर्ड

स्पाइसेस बोर्ड के निदेशक, विपणन, बशिष्ठ नारायण झा ने कहा कि बोर्ड ने बिहार को प्राथमिकता वाले राज्य के रूप में चिन्हित किया है और आरपीसीएयू एक महत्वपूर्ण हितधारक है.

उन्होंने कहा कि भारतीय मसालों की दुनिया भर में काफी मांग है और मसाला निर्यात में इसका योगदान 42 हजार करोड़ रुपये से अधिक है. बिहार में मसाला निर्यात की अप्रयुक्त क्षमता है.

उन्होंने कहा कि समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, वैशाली, चंपारण, दरभंगा, मधुबनी, बेगूसराय, नालंदा, गया और भागलपुर जैसे जिले विश्वस्तरीय हल्दी, अदरक, मिर्च और अन्य बीज मसालों का उत्पादन कर सकते हैं.

बशिष्ठ नारायण झा ने कहा कि स्पाइसेस बोर्ड का उद्देश्य बिचौलियों को कम करना, ट्रेसेबिलिटी सुनिश्चित करना, जीआई टैगिंग को बढ़ावा देना और किसानों को प्रीमियम कीमत दिलाने में मदद करना है. उन्होंने कहा कि स्पाइसेस बोर्ड कोलकाता स्थित क्यूईएल लैब के माध्यम से निर्यात प्रोत्साहन, क्षमता निर्माण और गुणवत्ता परीक्षण के लिए हरसंभव सहायता प्रदान करेगा.

200 से अधिक किसान और 53 निर्यातक हुए शामिल

इस अवसर पर निदेशक अनुसंधान डॉ. ए. के. सिंह एवं डीन पीजीसीए डॉ. मयंक राय ने भी अपने विचार व्यक्त किए.

कार्यक्रम के दौरान स्कूल ऑफ एग्री-बिजनेस एंड रूरल मैनेजमेंट के डॉ. रामदत्त के तत्वावधान में इनक्यूबेशन सेंटर द्वारा सहायता प्राप्त उद्यमी के सोनाचूर चावल के पैकेट का भी विमोचन किया गया.

तकनीकी सत्र में व्यवसाय और निर्यात के अवसरों की तलाश, किसानों और एफपीओ के साथ मजबूत संबंध बनाने, मूल्य संवर्धन एवं बाजार पहुंच को बढ़ावा देने तथा बिहार में मसाला मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने पर चर्चा हुई.

सम्मेलन में बिहार के 200 से अधिक मसाला उत्पादक किसान, एफपीओ सदस्य, व्यापारी एवं केरल, असम समेत देशभर के करीब 53 निर्यातक, वैज्ञानिक और छात्र शामिल हुए.

कार्यक्रम का संचालन डॉ. ईश प्रकाश ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ए. के. मिश्रा ने किया. मौके पर डीन फिशरीज डॉ. पी. पी. श्रीवास्तव, डीन कम्युनिटी साइंस डॉ. उषा सिंह, डॉ. शंकर झा, डॉ. सीके झा, शिरीष चौधरी, डॉ. सुधानंद प्रसाद लाल, डॉ. कुमार राज्यवर्धन समेत विभिन्न शिक्षक, वैज्ञानिक एवं पदाधिकारी मौजूद थे.

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By Subash chandra ku

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