समस्तीपुर: किसानों के लिए चालू मौसम कृषि कार्यों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है. कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेत की स्थिति और फसल की अवस्था के अनुसार सही खाद-उर्वरक प्रबंधन करें और बोआई का काम समय पर पूरा करें. मक्का, शकरकंद, मिश्रीकंद, मूली और पपीते की खेती को लेकर विशेषज्ञों ने जरूरी सुझाव दिये हैं.
मक्का में करें अंतिम उपरिवेशन
मक्का की फसल फिलहाल टेसलिंग से सिल्किंग की संवेदनशील अवस्था में है. फसल के बेहतर विकास और अच्छे उत्पादन के लिए प्रति हेक्टेयर 30 किग्रा नत्रजन की दर से अंतिम उपरिवेशन करने की सलाह दी गयी है.
शकरकंद की बोआई का उपयुक्त समय
शकरकंद की बोआई के लिए यह उपयुक्त समय है. इसके लिए मिट्टी व खेत की तैयारी कर लें. हल्की बलुई दोमट और जल निकासी वाली भूमि का चयन करें. पहली जुताई से पूर्व 100 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से कम्पोस्ट मिलाएं. अंतिम जुताई के समय प्रति हेक्टेयर 60 किग्रा नत्रजन, 40 किग्रा फास्फोरस और 60 किग्रा पोटाश दें.
उत्तर बिहार के लिए राजेंद्र शकरकंद-5, राजेंद्र शकरकंद-35, राजेंद्र शकरकंद-41, राजेंद्र शकरकंद-43, राजेंद्र शकरकंद-92, श्री भद्रा एवं कालमेघ उन्नत किस्में हैं. पौधों और पंक्तियों के बीच 30 गुणा 30 सेमी की दूरी रखने की सलाह दी गयी है.
ऊंचास खेतों में शुरू करें मिश्रीकंद की बोआई
ऊंचास खेतों में मिश्रीकंद की बोआई शुरू की जा सकती है. उत्तर बिहार के लिए राजेंद्र मिश्रीकंद-1 और राजेंद्र मिश्रीकंद-2 अनुशंसित किस्में हैं. बोआई के लिए 50-55 किग्रा प्रति हेक्टेयर बीज का इस्तेमाल करें. पौधों की बोआई 15 गुणा 15 सेमी की दूरी पर करें.
खेत तैयार करते समय 200 क्विंटल कम्पोस्ट के साथ प्रति हेक्टेयर 80 किग्रा नत्रजन, 60 किग्रा फास्फोरस और 80 किग्रा पोटाश दें. बोआई के समय नत्रजन की आधी मात्रा तथा फास्फोरस एवं पोटाश की पूरी खुराक आधार खाद के रूप में दें. नत्रजन की शेष आधी मात्रा बोआई के 40-45 दिन बाद उपरिवेशन के रूप में प्रयोग करें.
मूली की बोआई अभी पूरी कर लें
किसानों को वर्तमान समय में मूली की बोआई का काम निपटा लेने की सलाह दी गयी है. इसके लिए काशी हंस, काशी लोहित, जौनपुरी जायंट, पालम हृदय, काशी श्वेता, पंजाब अगेती, स्कारलेट लॉन्ग, पूसा चेतकी, पूसा देसी, पूसा हिमानी, पूसा रश्मि, जापानी व्हाइट, जौनपुरी व्हाइट, आइसीकल, पंजाब सफेद, चाइनीज पिंक, हिसार मूली नं. 1 एवं अरका निशांत जैसी उपयुक्त किस्मों का चयन किया जा सकता है.
प्रति हेक्टेयर 7-8 किग्रा बीज की आवश्यकता होती है. बोआई के दौरान 30 गुणा 10 सेमी की दूरी बनाए रखें. खेत में 150-200 क्विंटल कम्पोस्ट के साथ प्रति हेक्टेयर 60 किग्रा नत्रजन, 40 किग्रा फास्फोरस और 40 किग्रा पोटाश दें.
पपीते की नई फसल के लिए भी सही समय
पपीते की नई फसल की बोआई के लिए भी यह समय उपयुक्त है. उत्तर बिहार के लिए पूसा ड्वार्फ, पूसा नन्हा, पूसा डिलिशियस, सीओ.-7, अरका सूर्य एवं रेड लेडी उत्तम किस्में बतायी गयी हैं.
प्रति हेक्टेयर 300-350 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है. बोआई से पहले प्रति किग्रा बीज को 2 ग्राम बाविस्टिन से उपचारित करें. 150 गेज की 20 गुणा 15 सेमी आकार वाली पॉलीथीन थैलियों में बीज बोएं तथा पौधों के बीच 7-10 सेमी की दूरी रखें. जब पौध 20-25 सेमी की ऊंचाई प्राप्त कर लें, तब स्वस्थ पौधों की मुख्य खेत में रोपाई करें.
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