समस्तीपुर जमीन रिकॉर्ड: जिले के कल्याणपुर अंचल में सरकारी और निजी जमीनों के अभिलेखों में कथित हेरफेर का मामला सामने आया है. बख्तियारपुर मौजा के रैयत कृष्ण मुरारी ने कल्याणपुर के अंचलाधिकारी शशि रंजन पर भू-माफियाओं से वित्तीय साठगांठ कर जमीन के रिकॉर्ड में जालसाजी कराने का आरोप लगाया है. शिकायत मिलने के बाद समस्तीपुर सदर के अनुमंडल पदाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संयुक्त जांच का निर्देश दिया है.
SDM ने साक्ष्य के साथ मांगी रिपोर्ट
एसडीएम ने कार्यपालक दंडाधिकारी और समस्तीपुर सदर के अंचल अधिकारी को आवेदन में लगाए गए आरोपों की बिंदुवार जांच करने का निर्देश दिया है. अधिकारियों से साक्ष्य के साथ संयुक्त जांच रिपोर्ट जल्द सौंपने को कहा गया है.
शिकायतकर्ता के अनुसार, मामला बख्तियारपुर मौजा की खाता संख्या 225, खेसरा संख्या 08 और 77 डिसमिल जमीन से जुड़ा है. आरोप है कि उनकी खतियानी निजी जमीन को गलत तरीके से दूसरे व्यक्ति के नाम दर्ज कराने का प्रयास किया गया.
पुराने जमाबंदी रिकॉर्ड में खेसरा जोड़ने का आरोप
आवेदक ने आरोप लगाया है कि 'सहयोग पोर्टल' पर दी गयी जांच रिपोर्ट में संबंधित जमीन को पुराने म्यूटेशन वाद संख्या 1021/2012-13 और जमाबंदी संख्या 2196 से जुड़ा बताया गया. जबकि शिकायतकर्ता का दावा है कि इस जमीन का पहले कभी म्यूटेशन नहीं हुआ था.
आरोप है कि परिमार्जन आवेदन के जरिए डिजिटल रिकॉर्ड में बदलाव कर वर्ष 1970 की पुरानी जमाबंदी संख्या 2196 में खेसरा संख्या 08 जोड़ दिया गया. शिकायतकर्ता ने मापी के आदेश, परिमार्जन आवेदन और न्यायालय के आदेशों की अनदेखी कर एक प्राथमिकी अभियुक्त को लाभ पहुंचाने का भी आरोप लगाया है.
हालांकि, इन सभी आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है. मामले में संयुक्त जांच के बाद ही रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी.
कई मौजों की जमीनों में गड़बड़ी का दावा
शिकायतकर्ता ने कल्याणपुर अंचल की अन्य जमीनों के रिकॉर्ड में भी कथित हेरफेर का आरोप लगाया है. शिकायत में तीरा, माधोपुर भुआल, कलौंजार, सिमरिया भिन्डी, मिर्जापुर, मालीनगर, बासुदेवपुर, जितवारिया और बख्तियारपुर मौजा की कई जमीनों का उल्लेख किया गया है.
इनमें खेसरा संख्या 395, 407, 394, 404, 1008, 531, 639, 2072, 2581, 362, 2347, 2222, 430, 252, 272, 5977, 713, 2657, 2836 और 04 समेत कई प्लॉट शामिल हैं.
फॉरेंसिक जांच और कार्रवाई की मांग
पीड़ित ने मूल भौतिक जमाबंदी पंजी के संबंधित पृष्ठ की फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की है, ताकि ओवरराइटिंग या बैकडेटिंग की स्थिति स्पष्ट हो सके. इसके अलावा चकमेहसी थाना कांड संख्या 64/2026 में सीओ को सह-अभियुक्त बनाने, निलंबन और गिरफ्तारी की मांग भी की गयी है.
साथ ही पूरे अंचल में सरकारी जमीनों के रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गयी है. फिलहाल एसडीएम के निर्देश के बाद जांच अधिकारियों की रिपोर्ट का इंतजार है. रिपोर्ट सामने आने के बाद ही आरोपों की पुष्टि और आगे की कार्रवाई की दिशा स्पष्ट होगी.
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