Samastipur News: जिले के विभिन्न कोटि के शिक्षकों के लंबे समय से लंबित अंतर वेतन और बकाया वेतन के भुगतान की प्रक्रिया अब तेज होने वाली है. जिला शिक्षा विभाग (स्थापना शाखा) ने भुगतान में आ रही तकनीकी बाधाओं को दूर करने के लिए सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (बीईओ) को नए निर्देश जारी किए हैं.
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) जमालुद्दीन ने कहा है कि पूर्व में भेजे गए ऐसे सभी विपत्र, जो नियमानुसार नहीं हैं या जिनमें शहरी आवास भत्ता गलत तरीके से जोड़ा गया है, उन्हें वापस कर निर्धारित नए प्रपत्रों में दोबारा भेजा जाए.
क्यों अटक रहा था वेतन भुगतान?
शिक्षा विभाग के अनुसार, कई शिक्षकों के अंतर वेतन और बकाया वेतन के विपत्र अनुमान्य शहरी आवास भत्ते के अनुरूप तैयार नहीं किए गए थे.
इसी वजह से भुगतान प्रक्रिया में तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनें आ रही थीं. अब एकरूपता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है.
चार नए प्रपत्रों में भेजनी होगी जानकारी
विभाग ने वेतन भुगतान के लिए चार अलग-अलग प्रपत्र जारी किए हैं.
- प्रपत्र-I : सभी कोटि के नियमित शिक्षकों का अंतर वेतन.
- प्रपत्र-II : सभी कोटि के नियमित शिक्षकों का बकाया वेतन.
- प्रपत्र-III : स्थानीय निकाय, मदरसा, संस्कृत एवं अल्पसंख्यक शिक्षकों का अंतर वेतन.
- प्रपत्र-IV : स्थानीय निकाय, मदरसा, संस्कृत एवं अल्पसंख्यक शिक्षकों का बकाया वेतन.
वेतन निर्धारण प्रपत्र लगाना होगा अनिवार्य
नए निर्देश के अनुसार, प्रत्येक नए विपत्र के साथ संबंधित शिक्षक का वेतन निर्धारण प्रपत्र संलग्न करना अनिवार्य होगा.
साथ ही अधिकारियों को विपत्र भेजने से पहले यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि शहरी आवास भत्ता नियमानुसार जोड़ा गया है, ताकि भुगतान में किसी प्रकार की देरी न हो.
अधिकारियों की जवाबदेही भी तय
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि विपत्र पर हस्ताक्षर करने वाले अधिकारी भुगतान राशि की स्वयं जांच करेंगे.
प्रत्येक पृष्ठ पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य होगा और अंतिम पृष्ठ पर घोषणा एवं प्रमाणीकरण भी दर्ज करना होगा. इससे भुगतान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी और गलत या फर्जी विपत्रों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी.
पात्र शिक्षकों को जल्द मिल सकती है राहत
विभाग को उम्मीद है कि नई प्रक्रिया लागू होने के बाद योग्य शिक्षकों के अंतर और बकाया वेतन का भुगतान तेजी से हो सकेगा.
इस पहल से भुगतान संबंधी लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने और पात्र शिक्षकों को उनका बकाया समय पर मिलने की संभावना बढ़ गई है.
