Samastipur News: डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा परिसर स्थित एडवांस सेंटर ऑफ मशरूम रिसर्च सेंटर में पुआल और ऑयस्टर मशरूम उत्पादन एवं प्रसंस्करण विषय पर चल रहे सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हो गया. समापन समारोह में प्रशिक्षण लेने वाले प्रतिभागियों के बीच प्रमाणपत्र वितरित किए गए.
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए निदेशक अनुसंधान डॉ. अनिल कुमार सिंह ने कहा कि प्रेरित और सफल मशरूम उत्पादकों से संपर्क स्थापित कर इस क्षेत्र में बेहतर व्यवसाय खड़ा किया जा सकता है. प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान को धरातल पर सही तरीके से लागू करने वाले उत्पादक ही राज्य और देश स्तर पर अपने कारोबार का विस्तार कर सकेंगे.
प्रशिक्षण के बाद शुरू होती है स्वरोजगार की राह
डॉ. अनिल कुमार सिंह ने कहा कि प्रशिक्षण का समापन स्वरोजगार का अंत नहीं, बल्कि उत्पादन और कारोबार की वास्तविक शुरुआत है. उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण के दौरान सीखी तकनीकों को व्यावहारिक रूप से अपनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि मशरूम उत्पादन से जुड़े लोगों के तकनीकी ज्ञान को बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालय के दरवाजे हमेशा खुले हैं.
पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर भी ध्यान देने की जरूरत
वैज्ञानिक डॉ. मुकेश कुमार ने कहा कि सात दिवसीय प्रशिक्षण में मशरूम उत्पादन की सभी तकनीकों को पूरी तरह सीख लेना संभव नहीं है. सफल व्यवसायी बनने के लिए उत्पादन के साथ-साथ उत्पादों की पैकेजिंग, लेबलिंग और ब्रांडिंग की जानकारी भी जरूरी है. बाजार में उत्पाद की पहचान बनाने के लिए इन पहलुओं पर विशेष ध्यान देना होगा.
‘बिना खेत वाली खेती’ को मशरूम ने किया साकार
मशरूम विशेषज्ञ डॉ. दयाराम ने कहा कि मशरूम उत्पादन ने ‘बिना खेत वाली खेती’ की कहावत को देश स्तर पर साकार किया है. उन्होंने बताया कि राज्य में सालभर मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय में मशरूम की दर्जनों उन्नत प्रजातियां विकसित की गई हैं.
कार्यक्रम का संचालन केंद्र प्रभारी डॉ. आरपी प्रसाद ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन वैज्ञानिक डॉ. आरपीके राय ने किया. इस मौके पर एलडीसी तेजप्रताप, रत्नेश कुमार ठाकुर, स्किल सपोर्टिंग स्टाफ रोहन कुमार, सुभाष कुमार समेत अन्य मौजूद रहे.
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