Agricultural University Pusa: आजीविका का साधन बना मशरूम : डा चंद्रा
मशरूम के मूल्यवर्धित उत्पादों द्वारा अनुसूचित जातियों का उद्यमिता विकास विषय पर एफपीओ मॉडल पांच दिवसीय प्रशिक्षण शुरू हुआ.
पूसा : डा राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय स्थित संचार केंद्र के पंचतंत्र सभागार में मशरूम के मूल्यवर्धित उत्पादों द्वारा अनुसूचित जातियों का उद्यमिता विकास विषय पर एफपीओ मॉडल पांच दिवसीय प्रशिक्षण शुरू हुआ. अध्यक्षता करते हुए आधार विज्ञान एवं मानविकी संकाय के डीन डा अमरेश चंद्रा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की दौर में मशरूम उत्पादन आजीविका साधन बन गया है. बिहार के मशरूम उत्पादन में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है. देश भर में बिहार प्रथम स्थान पर पहुंच चुका है. देश भर में एक लाख 35 हजार टन मशरूम उत्पादन हो रहा है. जबकि अकेले बिहार में 40 हजार टन मशरूम उत्पादित हो रहा है. मशरूम का बेहतर प्रसंस्करण हो तो विदेशों की बाजार में टक्कर दिया जा सकता है. प्रसार शिक्षा निदेशक डा मयंक राय ने कहा कि मशरूम देश भर के लोगों के बीच पसंदीदा व्यंजन के रूप में परोसा जा रहा है. हालांकि मांग के अनुसार मशरूम उत्पादन ही नहीं हो रहा है. मशरूम के बीज निर्माण में भी रोजगार का अवसर है. वैज्ञानिक मुकेश कुमार ने कहा कि औषधीय गुणों से भरपूर मशरूम अब भारत ही नहीं विश्व स्तर के बाजारों में बिकने के लिए तैयार है. प्रशिक्षण के दौरान स्वागत भाषण मशरूम विशेषज्ञ डा दयाराम ने किया. संचालन मशरूम वैज्ञानिक सुधानंदनी ने किया. धन्यवाद ज्ञापन डा आरपी प्रसाद ने किया. मौके पर टेक्निकल टीम के सुरेश कुमार, सुभाष कुमार आदि मौजूद थे.
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