Samastipur News: समस्तीपुर जिले के मोरवा प्रखंड में जिलाधिकारी के तबादला आदेश के पालन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. आरोप है कि बाल विकास परियोजना कार्यालय सहित अन्य विभागों में स्थानांतरित कर्मियों को अब तक रिलीव नहीं किया गया है. स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि हिसाब-किताब पूरा होने तक कर्मियों को कार्यमुक्त नहीं किया जा रहा है, जिससे परियोजना की कार्यप्रणाली भी प्रभावित हो रही है.
डीएम ने एक सप्ताह में योगदान देने का दिया था निर्देश
जानकारी के अनुसार 26 जून को जिलाधिकारी की ओर से जारी पत्र में महिला पर्यवेक्षक, समन्वयक और डाटा ऑपरेटरों को एक सप्ताह के भीतर स्थानांतरित स्थान पर योगदान देने का निर्देश दिया गया था. इसके बावजूद कई कर्मी अब भी पुराने पदस्थापन स्थल पर कार्यरत हैं. इसे लेकर लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं.
रिलीविंग में देरी की वजह बना हिसाब-किताब
सूत्रों के अनुसार स्थानांतरण के बाद संबंधित सेक्टरों के लंबित हिसाब-किताब को पूरा करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है. चर्चा है कि पोषाहार राशि और अन्य वित्तीय मामलों का मिलान होने के बाद ही कर्मियों को रिलीव किया जाएगा. हालांकि इस संबंध में आधिकारिक स्तर पर कोई लिखित पुष्टि नहीं हुई है.
परियोजना के कामकाज पर पड़ रहा असर
बताया जा रहा है कि स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण और कई अन्य प्रशासनिक कार्य प्रभावित हुए हैं. वहीं जून महीने में पोषाहार की राशि नहीं मिलने और जुलाई के आवंटन के बाद सेविकाओं से संबंधित वित्तीय प्रक्रिया पूरी कराने की बात भी सामने आ रही है.
महिला पर्यवेक्षकों ने कही यह बात
महिला पर्यवेक्षकों का कहना है कि जब तक सक्षम अधिकारी उन्हें औपचारिक रूप से रिलीव नहीं करेंगे, तब तक वे नए पदस्थापन स्थल पर योगदान नहीं दे सकतीं. दूसरी ओर स्थानीय लोगों का कहना है कि जब जिलाधिकारी का स्पष्ट आदेश जारी हो चुका है तो उसके पालन में देरी क्यों हो रही है, इसकी जांच होनी चाहिए.
यह भी पढ़ें: समस्तीपुर शिक्षा विभाग में तबादले के बाद सम्मान समारोह, नए डीपीओ का हुआ स्वागत
