Mordiva Mukhiya: सदर प्रखंड की ग्राम पंचायत राज मोरदीवा के मुखिया रामाधार सिंह की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं. बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा 18(5) के तहत उन्हें पद से हटाने के लिए जिला पदाधिकारी रोशन कुशवाहा ने प्रमंडलीय आयुक्त-सह-लोक प्रहरी, दरभंगा प्रमंडल को औपचारिक अनुशंसा भेजी है. यह कार्रवाई विजय वात्स्यायन, ललिता देवी एवं अन्य ग्रामीणों की शिकायतों की जांच के आधार पर की जा रही है.
जांच में सामने आयीं कई अनियमितताएं
अनुमंडल पदाधिकारी, समस्तीपुर की जांच रिपोर्ट में ग्राम सभा समय पर नहीं बुलाने समेत कई मामलों में अनियमितता सामने आने की बात कही गयी है. मुखिया की ओर से ग्राम सभा नहीं बुलाने का कारण वार्ड सदस्यों का असहयोग बताया गया, लेकिन जांच के दौरान कई बार मांग किये जाने के बावजूद इसके समर्थन में कोई लिखित अभिलेख प्रस्तुत नहीं किया गया.
सोलर लाइट भुगतान मामले में ब्रेडा की टीम ने सामग्री को घटिया पाया था. इस मामले में लोकायुक्त की ओर से मुखिया पर पांच लाख रुपये और तत्कालीन पंचायत सचिव कमल किशोर व राम प्रवेश सिन्हा पर तीन-तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था. जुर्माने की राशि जमा होने की बात कही गयी, लेकिन संबंधित दस्तावेज जांच अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत नहीं किये गये.
पंचायत सचिव के खिलाफ प्राथमिकी की अनुशंसा
वार्डों में स्वच्छता पर्यवेक्षक, रिक्शा चालक और स्वच्छता कर्मियों की नियुक्ति में मनमानी के आरोपों पर भी कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण या दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया. वहीं नए पंचायत सचिव को पुराने पंचायत सचिव द्वारा प्रभार नहीं देने को भी वित्तीय अनियमितता की आशंका से जोड़कर देखा गया है.
जांच रिपोर्ट में पूर्व पंचायत सचिव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की अनुशंसा की गयी है. योजनाओं से संबंधित एस्टीमेट और मेजरमेंट बुक उपलब्ध नहीं होने के कारण जांच भी प्रभावित हुई.
रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने माना कि मुखिया और तत्कालीन पंचायत सचिव की ओर से सरकारी राशि एवं पद के दुरुपयोग के साथ जांच प्रक्रिया में भी अपेक्षित सहयोग नहीं किया गया. इन्हीं गंभीर आरोपों के आधार पर डीएम ने धारा 18(5) के तहत मुखिया रामाधार सिंह को पद से हटाने की मजबूत अनुशंसा प्रमंडलीय आयुक्त से की है.
