Samastipur MDM: समस्तीपुर जिले के सरकारी प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) योजना को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त व्यवस्था लागू कर दी है. अब सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों और प्रभारी शिक्षकों को हर कार्य दिवस पर सुबह 11:00 बजे तक ई-शिक्षाकोष मोबाइल एप पर छात्रों की कुल उपस्थिति और मध्याह्न भोजन प्राप्त करने वाले बच्चों की संख्या दर्ज करना अनिवार्य होगा. समय सीमा के बाद रिपोर्ट अपडेट करने पर संबंधित प्रधानाध्यापक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी.
ई-शिक्षाकोष एप में जोड़ा गया नया मॉड्यूल
शिक्षा विभाग के अपर राज्य परियोजना निदेशक (स-प्रभारी, केन्द्रीयकृत अनुश्रवण कोषांग) रवि शंकर सिंह और मध्याह्न भोजन योजना के निदेशक विनायक मिश्र की ओर से जारी निर्देश के अनुसार, ई-शिक्षाकोष पोर्टल में नया मॉड्यूल जोड़ दिया गया है. इसके लिए मोबाइल एप का वर्जन 3.6.0 भी गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध करा दिया गया है.
विभाग ने सभी प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया है कि वे तुरंत एप का नया वर्जन डाउनलोड करें और प्रतिदिन सुबह 11 बजे से पहले छात्रों की उपस्थिति तथा मिड-डे मील का पूरा डेटा अपलोड करें.
फर्जीवाड़ा रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने की पहल
शिक्षा विभाग का मानना है कि नई व्यवस्था से मध्याह्न भोजन योजना में पारदर्शिता बढ़ेगी. अब रीयल-टाइम डेटा उपलब्ध होने से छात्रों की वास्तविक उपस्थिति और भोजन प्राप्त करने वाले बच्चों की संख्या का सही मिलान किया जा सकेगा.
अब तक कई मामलों में दोपहर बाद या अगले दिन रिपोर्ट अपलोड होने के कारण आंकड़ों में अंतर और गड़बड़ी की शिकायतें सामने आती थीं. विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने से फर्जी रिपोर्टिंग, आंकड़ों में हेर-फेर और भोजन की बर्बादी जैसी समस्याओं पर प्रभावी रोक लगेगी.
जिला अधिकारियों को भी दिए गए सख्त निर्देश
मध्याह्न भोजन योजना के निदेशक विनायक मिश्र ने सभी जिला कार्यक्रम अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने जिलों के सभी सरकारी विद्यालयों में इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराएं. यदि कोई प्रधानाध्यापक सुबह 11 बजे की निर्धारित समय-सीमा तक डेटा अपलोड नहीं करता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
अधिक प्रभावी होगी MDM योजना की निगरानी
शिक्षा विभाग को उम्मीद है कि इस नई डिजिटल व्यवस्था से मध्याह्न भोजन योजना की निगरानी और अधिक प्रभावी होगी तथा सरकारी स्कूलों में योजना का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पारदर्शी तरीके से पहुंच सकेगा.
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