Samastipur News: डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (आरपीसीएयू), पूसा के कुलपति डॉ. पी.एस. पांडेय ने पीएचडी शोध प्रतिवेदन (सिनॉप्सिस प्रेजेंटेशन) की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किया है. नई व्यवस्था के तहत अब सभी पीएचडी शोध प्रतिवेदन कुलपति और बाह्य विशेषज्ञों की उपस्थिति में प्रस्तुत किए जाएंगे.
4 से 6 अगस्त तक चल रही शोध प्रतिवेदन प्रस्तुति
इसी क्रम में 4 अगस्त से 6 अगस्त तक विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के पीएचडी छात्र विद्यापति सभागार में अपने शोध प्रतिवेदन प्रस्तुत कर रहे हैं. निदेशक शिक्षा डॉ. उमाकांत बेहरा के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के सभी डीन, प्रोफेसर और पीएचडी पर्यवेक्षक भाग ले रहे हैं.
सोमवार को शोध प्रतिवेदन की प्रस्तुति रात करीब नौ बजे तक चली, जबकि मंगलवार को भी देर शाम तक कार्यक्रम जारी रहने की संभावना जताई गई.
शोध का उद्देश्य किसानों और समाज की समस्याओं का समाधान
कुलपति डॉ. पी.एस. पांडेय ने कहा कि पीएचडी शोध विश्वविद्यालय और कृषि के समन्वित विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. उन्होंने कहा कि सभी अनुसंधानों का उद्देश्य किसानों और समाज की समस्याओं का समाधान होना चाहिए.
उन्होंने बताया कि शोध प्रतिवेदन की स्वीकृति में बाह्य विशेषज्ञों और अन्य वैज्ञानिकों की एकमत राय आवश्यक है. विश्वविद्यालय का लक्ष्य पीजी और पीएचडी शोध के स्तर को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करना है.
शोध में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं
निदेशक शिक्षा डॉ. उमाकांत बेहरा ने कहा कि कुलपति शोध की गुणवत्ता को लेकर बेहद गंभीर हैं और उनका स्पष्ट निर्देश है कि शोध कार्य में किसी भी प्रकार की कोताही स्वीकार नहीं की जाएगी.
बाह्य विशेषज्ञ ने की पहल की सराहना
पीएचडी शोध प्रतिवेदन प्रस्तुति में बाह्य विशेषज्ञ के रूप में शामिल डॉ. आर.बी. तिवारी ने कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय देश का पहला विश्वविद्यालय है, जहां पीजी और पीएचडी शोध प्रतिवेदन की प्रस्तुति में कुलपति स्वयं उपस्थित रहते हैं.
उन्होंने कहा कि इससे शोध की गुणवत्ता के प्रति विश्वविद्यालय की गंभीरता स्पष्ट होती है. उनके अनुसार, यदि इसी दिशा में कार्य जारी रहा तो आने वाले दो से तीन वर्षों में विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग हासिल कर सकता है.
कार्यक्रम में निदेशक शोध डॉ. ए.के. सिंह, डीन पीजीसीए डॉ. मयंक राय सहित विभिन्न शिक्षक, वैज्ञानिक और पदाधिकारी मौजूद रहे.
