PRASHAST App 2.0: समस्तीपुर जिले के सरकारी और निजी विद्यालयों में जल्द ही PRASHAST App 2.0 के माध्यम से विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान की जाएगी. इस डिजिटल ऐप की मदद से शिक्षक बच्चों के व्यवहार, पढ़ाई, शारीरिक गतिविधियों और सामाजिक सहभागिता से जुड़े सवालों के आधार पर शुरुआती स्क्रीनिंग करेंगे. पूरी प्रक्रिया में केवल 10 से 15 मिनट का समय लगेगा.
21 प्रकार की दिव्यांगताओं के लक्षणों की होगी पहचान
ऐप बच्चों में दृष्टि बाधा, श्रवण बाधा, बौद्धिक दिव्यांगता, ऑटिज्म, लर्निंग डिसेबिलिटी समेत कुल 21 श्रेणियों की संभावित दिव्यांगताओं के शुरुआती संकेतों की पहचान करेगा. यदि किसी बच्चे में ऐसे लक्षण मिलते हैं, तो उसे समग्र शिक्षा अभियान के तहत आवश्यक शैक्षणिक सहायता, विशेषज्ञ परामर्श और अन्य सुविधाओं से जोड़ा जाएगा.
महीनों की प्रक्रिया अब मिनटों में होगी पूरी
अब तक दिव्यांग बच्चों की पहचान और रिपोर्ट तैयार करने में कई महीने लग जाते थे, जिससे समय पर सहायता नहीं मिल पाती थी. नई डिजिटल व्यवस्था से यह प्रक्रिया तेज और पारदर्शी होगी. स्कूल प्रधानाध्यापक, सामान्य शिक्षक, विशेष शिक्षक और जिला स्तर के अधिकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर जुड़े रहेंगे, जिससे डेटा की निगरानी और समीक्षा आसान होगी.
30 जुलाई तक शिक्षकों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
शिक्षा विभाग ने सभी शिक्षकों को 30 जुलाई तक यू-डायस (UDISE) में पंजीकृत मोबाइल नंबर के माध्यम से PRASHAST App 2.0 पर रजिस्ट्रेशन करने का निर्देश दिया है. इसके बाद 15 अगस्त से 15 सितंबर तक राज्यभर के स्कूलों में पहले चरण का स्क्रीनिंग अभियान चलाया जाएगा.
एनसीईआरटी करेगी पूरी प्रक्रिया की निगरानी
समावेशी शिक्षा की राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी गार्गी कुमारी ने सभी जिलों के डीईओ और डीपीओ (एसएसए) को इस अभियान में तेजी लाने का निर्देश दिया है. पूरी प्रक्रिया की निगरानी सीधे एनसीईआरटी मुख्यालय स्तर से की जाएगी, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो.
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