Samastipur News: समस्तीपुर : हाई स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए सरकार ने एक बड़ी पहल की थी. पहल थी, विद्यालयों में जिम खोलने की. ताकि छात्र-छात्राओं का शरीर मजबूत हो और साथ ही उनका मानसिक विकास भी हो. उद्देश्य को अमली-जामा पहनाने के लिए करीब सोलह साल पूर्व ही स्कूलों में जिम के लिए सरकार ने राशि उपलब्ध करा दी. तमाम हाई स्कूलों में भी जिम के लिए राशि आवंटित की कर दी गई. कुछ हाई स्कूलों ने राशि वापस कर दी तो कई हाई स्कूल में जिम खुल भी गए, लेकिन असली समस्या शारीरिक शिक्षक की बनी रही. इन शिक्षकों के अभाव में अधिकांश स्कूलों में जिम सिर्फ दिखाने भर की वस्तु बनकर रह गई. आज भी स्कूलों के जिम बंद हैं और स्कूल आने वाले बच्चे इन्हें देखकर ही संतोष कर लेते हैं. शिक्षा विभाग के आंकड़े बताते हैं कि 2005-06 वित्तीय वर्ष से ही प्रत्येक हाई स्कूल में जिम की व्यवस्था के साथ ही खेल मैदान के विकास के लिए दो-दो लाख रुपये देने का काम शुरू किया गया. राशि प्राप्त होने के बाद कुछ स्कूलों में जिम के सामानों की खरीद भी की गई. बावजूद इसके यहां पढ़ने वाले बच्चों के लिए जिम केवल दिखावे के ही हैं. हां कुछ विद्यालयों में जैसे-तैसे जिम संचालित होता है, लेकिन उसका लाभ शायद ही बच्चों को मिलता हो.
क्या थी योजना
बच्चों की शिक्षा एवं स्वास्थ्य के लिए सरकार के द्वारा एक के बाद एक योजनाएं लाई जा रही हैं. इन योजनाओं के तहत धरातल पर शिक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधित सामग्री भी समय- समय पर विभाग को उपलब्ध कराया जाता रहा है. कितु स्थल पर पहुंचने के बाद लाखों की सामग्री ढाक के तीन पात साबित होती रही है. सरकार ने चिन्हित प्रत्येक हाई स्कूलों को 1.60 लाख रुपये की राशि जिम के लिए देने का निर्णय लिया था. जिले के हाई स्कूलों के लिए वर्ष 2005-06 से लेकर 2008-09 तक इस मद में करीब 1 करोड़ की राशि खर्च की गई है. खेल के विकास के लिए स्टेडियमों की दशा सुधारने के लिए भी प्रत्येक स्कूल में चालीस-चालीस हजार की राशि दी गई है. यह राशि खर्च करने का एकमात्र उद्देश्य था कि बच्चों में खेल की भावना पैदा हो. राशि प्राप्त होने के बाद जिम के संचालन के लिए सबसे बड़ी जरूरत शारीरिक शिक्षकों की है. लेकिन इस जिले के तमाम हाई स्कूलों की दशा यह कि केवल 18 प्रतिशत स्कूलों में ही शारीरिक शिक्षक कार्यरत हैं. शेष विद्यालय शारीरिक शिक्षक विहीन हैं. ऐसे में इनके अभाव में जिम की व्यवस्था के सफल संचालन का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है.क्या है खेल शिक्षा का नियम
नियमों की बात करें, तो सरकार व शिक्षा महकमे का स्पष्ट निर्देश है कि प्रत्येक हाई स्कूल में दिन की दूसरी पाली की अंतिम एक या दो घंटी को खेल के लिए रखा जाये. इस घंटी में बच्चों को खेल के बारे में शिक्षा दी जाएगी तथा साथ ही जिम व अन्य खेल के बारे में छात्र-छात्राएं प्रैक्टिस कर सकेंगे. कुछ विद्यालय ऐसे है जहां एक कमरे में जिम करने वाली सामग्री को रख कर ताला जड़ दिया गया. जिम की सामग्री की इस तरह से उपेक्षा की गई कि मशीनों को सेट कर रखना भी मुनासिब नहीं समझा गया. यह सामग्री कुछ हाई स्कूल के एक बंद कमरे में 16 वर्षों से धूल फांक रही है. कुछ एचएम का कहना है कि जिम सिखाने के लिए जिस तरह का कमरा चाहिए उस तरह का कमरा विद्यालय को उपलब्ध नहीं है. जिस कमरा में यह सामग्री रखी गई है वह सामान से ही भरा पड़ा है. बात में सच्चाई भी है, विद्यालय को एक भी तो ऐसा कमरा होना चाहिए जहां 5 से 10 की संख्या में बच्चे जाकर जिम कर सकें. जिस कमरे में जिम की सामग्री रखी गई है वहां पैर रखने की भी जगह नहीं है. सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि हाई स्कूल का निरीक्षण करने वाले पदाधिकारी जिम की स्थिति से अवगत होना भी मुनासिब नहीं समझते हैं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
