Samastipur News:दुग्धावस्था में आने वाले पिछात धान की फसल को गंधी बग कीट से बचायें किसान

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय,पूसा के द्वारा किसानों के लिये समसायमिक सुझाव जारी किये गये हैं.

Samastipur News:समस्तीपुर : डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय,पूसा के द्वारा किसानों के लिये समसायमिक सुझाव जारी किये गये हैं. किसानों को सलाह दिया गया है कि बालियां निकलने तथा दूध भरने की अवस्था वाली पिछात धान की फसल में गंधी बग कीट की निगरानी करें. धान की इस अवस्था में यह कीट पौधों को अधिक क्षति पहुंचाती है, जिससे उपज में काफी कमी होता है. इस कीट के शिशु एवं पौढ़ दुग्धावस्था वाली धान की फसल में बालियों का रस चूसना प्रारंभ कर देती हैं, जिससे दाने खोखले एवं हल्के हो जाते हैं तथा छिलका का रंग सफेद हो जाता है. इसके शरीर से विशेष प्रकार की बदबू निकलती है, जिसकी वजह से इसे खेतों में आसानी से पहचाना जा सकता है. इसकी संख्या जब अधिक हो जाती है तो एक-एक बाल पर कई कीट बैठे मिलते हैं. इसके नियंत्रण के लिए फॉलीडाल 10 प्रतिशत धूल का प्रति हेक्टेयर 10-15 किलोग्राम की दर से भूरकाव 8 बजे सबुह से पहले अथवा 5 बजे शाम के बाद बालियों पर करें. खतों के आसपास के मेड़ों पर दवा का भूरकाव आवश्य करें. शुष्क मौसम की संभावना को देखते हुए किसान अगात मक्का की तैयार फसलों की कटाई करें. रबी फसल के लिए खेत की तैयारी करें. फसलों की स्वस्थ एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए 150-200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से गोबर खाद की मात्र पूरे खेत में अच्छी प्रकार बिखेड़कर मिला दें. खड़ी फसलों में कीट व्याधि का निरीक्षण करते रहें. 20 अक्टबूर के बाद शरदकालीन गन्ना की रोपाई की जा सकती है. शरदकालीन गन्ना, मसूर, मटर, राजमा, मेथी, लहसुन, धनियां, राई एवं सर्युमुखी फसलों के समय से बोआई के लिए खेतों की तैयारी करें. खेत से सटे मेड़ों,नालों एवं आसपास के रास्तों में उगे अवांछित जंगलों की साफ-सफाई आवश्य करें, ताकि इन जंगलों में छिपे कीट व रोगों के कारक आदि सम्पूर्ण रुप से नष्ट हो जाए. गोबर की सड़ी खाद 150-200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से पूरे खेत में अच्छी प्रकार बिखेड़कर एवं जुताई कर मिला दें. यह खाद भूमि की जलधारण क्षमता एवं पोषक तत्वों की मात्र बढ़ाती है. खेतों में अंकुरण के लायक नमी बनाये रखने के लिए खाली खेतों की प्रत्येक जुताई के बाद पाटा आवश्य चला दें. उंचास खेतों में किसान तोरी की बोआई शुरु करें. तोरी की आरएयुटीएस-17,पंचाली, पीटी-303 एवं भवानी किस्में उत्तर बिहार के लिए अनुशंसित है. खेत की अंतिम जुताई के समय 30 किलोग्राम नत्रेजन, 40 किलोग्राम स्फुर, 40 किलोग्राम पोटास तथा 20 से 30 किलोग्राम गंधक प्रति हेक्टेयर की दर से व्यवहार करें. जिंक की कमी वाले खेत में 25 किलोग्राम जिंक सल्फेट प्रति हेक्टयेर की दर से व्यवहार करें. आलू, मक्का, चना, मटर, राजमा, मेथी तथा लहसुन फसलों ंके समय से बोआई के लिए खेतों की तैयारी करें. गोबर की सड़ी खाद 150-200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से पूरे खेत में अच्छी प्रकार बिखेड़कर एवं जुताई कर मिला दें. खेतों में अंकुरण के लायक नमी बनाये रखने के लिए खाली खेतों की प्रत्येक जुताई के बाद पाटा आवश्य चला दें. मिर्च, फूलगोभी, टमाटर एवं बैगन की फसल में आवश्यकतानुासर निकाई-गुड़ाई करें. फूलगोभी की फसल में पत्ती खाने वाली कीट की निगरानी करें. इस कीट के पिल्लू फूलगोभी की मध्यवाली पत्तियों तथा सिरवाले भाग को अधिक क्षति पहुंचाती है. शुरुआती अवस्था में यह पिल्लू पत्तियों की निचली सतह में सुरंग बनाकर एवं उसके अन्दर पत्तियों को खाता है. इस कीट से बचाव हेतु स्पनोसेड 48 इसी दवा एक मिली प्रति 4 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें. फूलगोभी की पिछात किस्मों जैसे माघी, स्नोकिंग, पूसा स्नोकिंग-1, पूसा-2, पूसा स्नोवॉल-16, पूसा स्नोवॉल के-1 की बोआई नर्सरी में करें. सितम्बर में बोयी गई अरहर की फसल में निकाई-गुड़ाई करें. जून-जुलाई में बोयी गई अरहर में कीट- व्याधि का निरीक्षण करें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >