Samastipur News: पूसा स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित 21वीं अनुसंधान परिषद की बैठक के दूसरे दिन मंगलवार को 40 से अधिक अनुसंधान परियोजनाओं की प्रस्तुति और गहन समीक्षा की गई. इससे पहले सोमवार देर रात तक अनुसंधान परियोजनाओं पर मंथन चलता रहा, जिसके बाद बैठक का समय सुबह 9 बजे निर्धारित किया गया.
बैठक में कोटा कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. ए.के. व्यास तथा बिहार सरकार के अतिरिक्त निदेशक कृषि डॉ. प्रमोद कुमार ने भाग लिया. डॉ. प्रमोद कुमार राज्य के प्रधान सचिव कृषि के प्रतिनिधि के रूप में बैठक में शामिल हुए.
विशेषज्ञों ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव
अनुसंधान परिषद की बैठक के दौरान जूनागढ़ एवं नवसारी कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. ए.आर. पाठक और कोटा कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. ए.के. व्यास ने विभिन्न अनुसंधान परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए वैज्ञानिकों से सवाल पूछे और अनुसंधान को और प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए.
कुलपति डॉ. पी.एस. पांडेय ने कहा कि अनुसंधान का मूल उद्देश्य किसानों की समस्याओं का समाधान होना चाहिए. उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय की सभी अनुसंधान परियोजनाएं किसानों की जरूरतों पर आधारित हैं और उनकी नियमित समीक्षा की जाती है. पिछले चार वर्षों में विश्वविद्यालय ने 20 से अधिक नई प्रभेद (वैरायटी) और कई नई तकनीकें जारी की हैं, जबकि 16 पेटेंट भी प्राप्त किए हैं.
नई तकनीकों और प्रभेदों के रिलीज पर होगा फैसला
कोटा कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. ए.के. व्यास ने कहा कि पूसा विश्वविद्यालय कृषि विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और यहां विकसित कई प्रभेदों की पूरे देश में मांग है. वहीं, अतिरिक्त निदेशक कृषि डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय बिहार के चतुर्थ कृषि रोडमैप को सफल बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है.
तीन दिवसीय अनुसंधान परिषद की बैठक में नई प्रभेद और तकनीकों को रिलीज करने के प्रस्तावों पर भी विचार किया जा रहा है. विशेषज्ञों की समीक्षा के बाद इन्हें जारी किए जाने की संभावना है.
बैठक में कुलसचिव डॉ. पी.के. प्रणव, निदेशक अनुसंधान डॉ. ए.के. सिंह, डीन फिशरीज डॉ. पी.पी. श्रीवास्तव, डीन पीजीसीए डॉ. मयंक राय, स्कूल ऑफ एग्री-बिजनेस एंड रूरल मैनेजमेंट के निदेशक डॉ. रामदत्त सहित विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक, शिक्षक एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे.
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