Samastipur News:चौराहे के ‘चाणक्यों’ कर रहे चुनावी गुणा भाग

विधानसभा चुनाव समाप्ति के बाद अब लोगों को मतगणना होने का इंतजार है. वहीं चौक-चौराहों पर लोगों की अपने-अपने प्रत्याशियों को जिताने को लेकर चर्चा पूरे शबाब पर है.

Samastipur News:समस्तीपुर : विधानसभा चुनाव समाप्ति के बाद अब लोगों को मतगणना होने का इंतजार है. वहीं चौक-चौराहों पर लोगों की अपने-अपने प्रत्याशियों को जिताने को लेकर चर्चा पूरे शबाब पर है. कोई किसी पार्टी को जीता रहा, तो कोई किसी पार्टी को. लोगों की प्रतिक्रियाएं यहां तक देखने को मिली कि वे अपने प्रत्याशी को गुणा-गणित में जितवाने में आक्रोशित भी होते दिखे. रविवार को शहर के हर क्षेत्र के हर गली, नुक्कड़ और चाय की दुकानों पर अपने आप को राजनीति के चाणक्य मानने वाले लोग आमजन के साथ अपनी-अपनी ओर से प्रत्याशियों के हार जीत के आंकड़े बिठाने में चाय की चुस्कियां के साथ व्यस्त रहे. चर्चा कभी कभी यहां तक बढ़ जाती है कि समर्थक अपनी बात को ऊपर रखने के लिए आवेश में आ जाते हैं. राजनीति पंडित भी अपने वर्षों के अनुभव के आधार पर प्रत्याशियों की जीत-हार के बारे में बताते रहे. लेकिन मतदान केन्द्रों पर महिला मतदाताओं की भीड़ के आगे सभी का अंदाजा फेल दिख रहा था. कहीं निर्दलीय का पलड़ा भारी तो कहीं त्रिकोणीय लड़ाई की चर्चा आम थी. अब लोगों की नजरें 14 नवंबर को होने वाली मतगणना पर टिकी है. शहर के भोला टाकिज गुमटी के निकट एक चाय की दुकान पर लोग अपनी-अपनी पसंद नापसंद के अनुसार ही प्रत्याशियों की जीत या हार का दावा कर रहे थे. यही नहीं कुछ लोग मिठाई खिलाने से लेकर नकद लेनदेन का बाजी भी लगा रहे थे तो कई भोज और बनारस घूमने की बात कर रहे थे. हालांकि किसका विश्लेषण सटीक होगा और किसका गलत यह कहना अभी मुश्किल है. लेकिन इतना स्पष्ट है कि जीत जिस किसी का भी हीं, हार-जीत का अंतर बहुत हीं कम रहने का अनुमान है. सभी के द्वारा अपने चेहते प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित की जा रही है. विधानसभा क्षेत्र के आंकड़े को टटोलने में हर कोई लगा है. सभी दलों के कार्यकर्ता अपने प्रत्याशी की बढ़त होने की बात कह रहे हैं. ज्ञात हो कि इस प्रकार के आकलन को खेल 14 नंवबर को सुबह तक चलेगा जब तक मतगणना का कार्य पूरा न हो जाये. दूसरी ओर मतदान के बाद मतदाता चुप बैठे हुए हैं. जिसके कारण विभिन्न दल के कार्यकर्ताओं को सही आंकड़ा नहीं मिल पा रहा है. जाति समीकरण के तहत सभी अपनी-अपनी जीत पक्की करने की बात कह रहे हैं. वहीं चुनावी शोर के थमते ही आमलोग अपने कार्य में लग गये.

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