पूसा में मखाना को ग्लोबल ब्रांड बनाने पर मंथन, 2-3 साल में निर्यात तीन गुना करने का लक्ष्य

बिहार के मखाने को ग्लोबल ब्रांड बनाने की तैयारी तेज हो गयी है. पूसा कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यशाला में अगले 2-3 वर्षों में मखाना निर्यात तीन गुना करने का लक्ष्य रखा गया. बौद्ध देशों समेत नए अंतरराष्ट्रीय बाजार तलाशने पर जोर दिया गया.

बिहार मखाना: राज्य के प्रमुख कृषि उत्पाद मखाना को वैश्विक बाजार में मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा में शुक्रवार को महत्वपूर्ण पहल हुई. विश्वविद्यालय परिसर के पंचतंत्र हॉल में ‘बिहार से मखाना की निर्यात मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना’ विषय पर ब्रेनस्टॉर्मिंग सह कार्यशाला आयोजित की गयी. इसमें कृषि वैज्ञानिकों, अधिकारियों, किसानों और उद्यमियों ने मखाना के निर्यात को बढ़ाने की रणनीति पर मंथन किया.

2-3 साल में तीन गुना निर्यात का लक्ष्य

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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पीएस पांडेय ने कहा कि मखाना बिहार की पहचान है और अब इसे ग्लोबल ब्रांड बनाने का समय आ गया है. इसके लिए उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, गुणवत्ता और निर्यात तक पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना होगा.

उन्होंने कहा कि किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, गुणवत्ता मानकों और निर्यात प्रोटोकॉल की भी जानकारी दी जानी चाहिए. एपीडा, नाबार्ड और एमएसएमई के सहयोग से मखाना उत्पादकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की योजना है. विश्वविद्यालय ने अगले 2-3 वर्षों में बिहार से मखाना निर्यात को तीन गुना करने का लक्ष्य रखा है.

बौद्ध देशों में निर्यात की बड़ी संभावना

कुलपति ने कहा कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मखाना की मांग का व्यापक मैपिंग किया जाना जरूरी है. खासकर बौद्ध देशों में बिहार के मखाने के लिए अच्छी संभावनाएं हैं. बिहार भगवान बुद्ध की धरती है और बौद्ध देशों के लोगों का राज्य से भावनात्मक जुड़ाव भी है. इस वजह से इन बाजारों को विशेष रूप से विकसित किया जा सकता है.

किसानों को एफपीओ से जोड़ने पर जोर

मुख्य अतिथि नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक गौतम कुमार सिंह ने कहा कि मखाना किसानों और उद्यमियों को वित्तीय सहायता, क्लस्टर विकास और मूल्य संवर्धन के लिए हरसंभव सहयोग दिया जाएगा. उन्होंने किसानों को एफपीओ के माध्यम से संगठित कर निर्यात योग्य उत्पाद तैयार करने पर जोर दिया.

वहीं, लघु एवं मध्यम उद्योग के निदेशक राकेश कुमार चौधरी ने कहा कि आधुनिक प्रोसेसिंग यूनिट और बेहतर पैकेजिंग तकनीक उपलब्ध कराकर मखाना की वैल्यू चेन को मजबूत किया जा सकता है. उन्होंने विश्वविद्यालय को विभाग की ओर से हरसंभव तकनीकी और वित्तीय सहयोग देने की बात कही.

नए अंतरराष्ट्रीय बाजार तलाशेगा एपीडा

एपीडा के प्रतिनिधि ने कहा कि निर्यात के लिए जरूरी प्रमाणन, बाजार लिंकेज और अंतरराष्ट्रीय मेलों में भागीदारी के लिए सहयोग किया जाएगा. मखाना के लिए नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों की पहचान को प्राथमिकता दी जाएगी.

कार्यशाला के तकनीकी सत्र में डॉ. पुष्पा सिंह ने संदर्भ प्रस्तुत किया, जबकि डॉ. रितंभरा सिंह ने मखाना के उत्पादन, प्रसंस्करण और निर्यात की संभावनाओं पर प्रस्तुति दी. इसके बाद वैज्ञानिकों, अधिकारियों और उद्यमियों ने निर्यात में आने वाली बाधाओं और उनके समाधान पर चर्चा की.

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By Subash chandra ku

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